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सौरमण्डल का सबसे बड़ा ग्रह

बृहस्पति के वायुमंडल का निर्माण 89% आणविक हाइड्रोजन और 11% हीलियम से हुआ है। बृहस्पति सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है। इसका द्रव्यमान सौरमंडल के अन्य सभी ग्रहों के कुल द्रव्यमान से 2.5 गुना ज्यादा है। इसमें 1300 पृथ्वियां आसानी से समा सकती हैं। यह अपनी धुरी पर एक चक्कर अत्यन्त तीव्र गति से लगती है लगभग, 9 घण्टे 55 मिनट के समय में पृथ्वी अपनी धुरी पर एक चक्कर  पूरा करता है। सूर्य की परिक्रमा पृथ्वी करीबन12 वर्षों में पूरी करता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह इतना विशाल ग्रह है कि तारा बन सकता था। 'वॉयजर 10 नामक अंतरिक्षयान से भेजे गए चित्रों से एक महत्वपूर्ण जानकारी यह मिली है कि शनि की भांति बृहस्पति का भी एक छल्ला है जो उसकी सतह से 300,000 किमी. दूरी तक फैला है। वैज्ञानिकों के मुताबिक इसके उपग्रह 'यूरोप 10 की बर्फीली सतह के नीचे मौजूद पानी जीवन का पोषक हो सकता है। हमारे सौरमण्डल में संभवत: सबसे बड़ी संरचना बृहस्पति का चुम्बकीयमंडल है  । यह अंतरिक्ष का वह क्षेत्र है, जहाँ बृहस्पति का चुम्बकीय क्षेत्र स्थित है। बृहस्पति के अभी तक खोजे गए 61 उपग्रहों में से 21 उपग्रहों की खोज 2003 में की गई। इसके चार मुख्य चंद्रमाओं- इयो, यूरोपा, गैनीमीड और कैलिस्टो की खोज गैलीलियो ने वर्ष 1610 में की थी।
शनि सौरमण्डल का छठवाँ और बृहस्पति के बाद सबसे विशाल ग्रह है। बृहस्पति की भांति ही शनि का निर्माण हाइड्रोजन, हीलियम तथा अन्य गैसों से हुआ। सौरमण्डल का दूसरा सबसे विशाल ग्रह होने के बाद भी  इसका द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान का 95 गुना है और घनत्व 0.70 ग्राम प्रति घन सेमी. है। शनि की उच्च चक्रण गति (प्रत्येक 10 घण्टे, 12 मिनट में एक) उसे सभी ग्रहों में सबसे ज्यादा चपटा बनाती हैं। वॉयजर 10 अंतरिक्षयान ने शनि के छल्लों की संख्या 1,000 निर्धारित की थी। लेकिन अब इसके छल्लों की संख्या एक लाख निर्धारित की गई है। ये छल्ले बर्फ के कणों से निर्मित है। अभी तक शनि के 31 ज्ञात उपग्रह हैं। शनि का सबसे बड़ा उपग्रह 'टाइटन 0है। यह सौरमण्डल का अकेला ऐसा उपग्रह है जिस पर वायुमंडल की उपस्थिति है।
यूरेनस की खोज सन 1781 में सर विलियम हर्शेल ने की थी। इसकी सूर्य से मध्य दूरी 286.9 करोड़ किमी. है। यह अपनी धुरी पर 970 पर झुका हुआ है और इसके इस अप्रत्याशित झुकाव के कारण ध्रुवीय क्षेत्रों को एक साल के दौरान अधिक सूर्य की किरणें मिलती हैं। एक यूरेनस वर्ष 84 पृथ्वी वर्षों के बराबर होता है। मीथेन की उपस्थिति की वजह से ग्रह का रंग हल्का हरा है। यह एकमात्र ऐसा ग्रह है जो एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव  तक अपनी प्रदक्षना  कक्षा में लगातार सूर्य के सामने ही रहता है।
वरुण, सूर्य से औसतन 2.8 अरब मील की दूरी पर स्थित है तथा 165 वर्षों में सूर्य की एक परिक्रमा पूर्ण करता है। वरुण सौरमंडल का आठवाँ ग्रह है। इसके वायुमंडल में मुख्य अवयव हाइड्रोजन और हीलियम है। वायुमंडल में मीथेन की उपस्थिति के कारण इसका रंग हल्का नीला है। अभी तक वरुण के 11 ज्ञात चंद्रमा हैं। ट्राइटन इसका सबसे बड़ा उपग्रह है। ट्राइटन की खासियत है कि यह वरुण की दिशा के विपरीत परिक्रमण करता है। 'वॉयजर 20 ने वरुण पर कई काले धब्बे पाए थे।इसमें से सबसे बड़ा धब्बा पृथ्वी के आकार का भी है


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