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शहीद भगत सिंह

 भारत के सबसे प्रभावशाली क्रांतिकारियों की सूची में भगत सिंह का नाम सबसे पहले लिया जाता है जब कभी भी हम उन शहीदों के बारे में सोचते है जिन्होंने देश की आज़ादी के लिये अपने  प्राणों कीआहुति दी तब हम बड़े गर्व से भगतसिंह को याद करते है. साल ,1929 में  भगत सिंह ने अपने साथियो के साथ मिलकर  लाला लाजपत राय की हत्या का बदला लेने के लिये  लोगो से भरी असेंबली में बम फेका ये बात ब्रिटिश नागरिको को नागवार गुजरी और भगत सिंह और इनके साथ भाईओ को 116 दिनों के लिए जेल भेज दिया गया  फिर बाद में , भगतसिंह मात्र 23  साल के एक युवा थे. इतनी युवा अवस्था में ही भगतसिंह को उनके दो युवा साथियो राजगुरुऔर सुखदेव के साथ फाँसी की सजा सुनी दी गई ये सब एक सोची समझी साजिश के तहत हुआ क्योकि 116 दिनों की जेल और फिर फाँसी , और फाँसी हुए भी तो समय से पहले और अंत बहुत भयानक तीनो शहीदों की फाँसी  देने के बाद  उनके चहरो को जला दिया फिर लाशो के टुकड़े करके उन्हें बोरो में बांध कर बहती नदी में प्रवाहित कर दिया गया  तभी से भगतसिंह देश के करोड़ो युवाओ के प्रेरणाधारक और सभी देशवासियो के चहेते बन गये थे आज भी इनकी गौरव गाथाओ का गुणगान गया जाता है करोड़ो लोगो के दिलो में राष्ट भक्ति  की अलक जगाने वाले भगत सिंह का पूरा नाम सरदारभगतसिंह है इनका जन्म सितम्बर माह में 28 तारीक को साल 1907 में हुआ इनकी जन्म भूमि चालनंबर 105, जीबी, बंगा ग्राम, जरंवाला तहसील लायलपुर जिला पंजाब में हुआ, जो उस वक्त ब्रिटिश कालीन भारत का ही एक प्रान्त था. जो इस वक्त पाकिस्तान में है इनके पिता किशनसिंह और माता विद्यावती दोनों देश भक्ती की भावना से ओतप्रोत थे भगत सिंह ने साल ,1923 में इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की इनकी शादी नही हुए थी भगत सिंह उर्फ़ शहीदभगतसिंह एक समाजवादी भी थे जो भारतीय स्वतंत्रता अभियानो के एक प्रभावशाली क्रांतिकारी माने जाते है. ये एक सिख परिवार में जन्मे  भगत सिंह हमेशा ब्रिटिशियो के विरुद्ध खड़े रहे  उन्होंने अपने युवा दिनों में यूरोपियनक्रांतिकारियों से अभ्यास भी काफी अच्छे से सीखा था और अराजकतावादी और मार्क्सवादी विचार धारा से  भी बहुत प्रभावित थे. उन्होंने अपने जीवन काल में कई क्रांतिकारी संस्थाओ के साथ मिलकर काम किया जिसमें हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन भी शामिल है,  इस एसोसिएशन ने1928 में अपना नाम बदलकर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसिएशन रखा. शायद बहुत कम लोग जानते हो पर भगतसिंह  को संधूजाट ने नाम से भी जानते है भगत सिंह को उनके परिवार वाले बहुत भाग्यशाली मानते थे क्योकि  नके जन्म के समय ही उनके दो चाचा उसी वक्त जेल से रिहा हुए थे  जानकारी रूप में बता दे की भगत सिंह का परिवार राजनीति में मुख्य रूप से सक्रिय थे .उनके दादा अर्जुन सिंह हिंदु आर्य समाज की पुन निर्मित  अभियान में दयानंद सरस्वती के अनुयायी रह चुके थे. इस सब का बहुत गहरा असर भगत सिंह पर भी पड़ा भगतसिंह के पिता और चाचा करतारसिंह, हरदयालसिंह द्वारा चलाई जा रही ग़दर पार्टी के वो भी सदस्य थे.भगत सिंह उनकी उम्र के दूसरे सिक्खों की तरह लाहौर की खालसा हाईस्कूल में नहीं गये थे. क्योंकि उनके दादा उन्हें ब्रिटिश सरकार की शिक्षा नहीं देना चाहते थे .भगत सिंह  दयानंद वैदिक हाईस्कूल में पढ़ने के लिए गये जो आर्यसमाज की ही एक संस्था थी.ये साल ,1919 की घटना है जब भगत सिंह 12 साल के ही थे उन्होंने उस वक्त  जलियां वाला बाग़ में हजारो निःशस्त्र लोगो को मारा गया.  जब भगत सिंह 14 साल के हुए तो उस उम्र में वो  लोगो की और अपनी रक्षा के लिए या देश की रक्षा के लिए ब्रिटिशो को मारते थे. भगत सिंह ने कभी महात्मागांधी के अहिंसा के तत्व को नहीं अपनाया, भगत सिंह का मानना था कि स्वतंत्रता पाने के लिए हिंसक बनना बहुत जरुरी है. वे हमेशा से गांधीजी की अहिंसा के अभियान का विरोध करते रहे क्योंकि, उनके अनुसार 1922 के चौरी चौरा कांड में मारे गये ग्रामीण लोगो के पीछे का कारण  गाँधी जी का अहिंसक रवैया अख्तियार करना ही था चोरी चोरा घटना का असर इतना भगत सिंहजी पर इतना ज्यादा हुआ कि . उसी वक्त भगत सिंह ने कुछ युवाओं के साथ मिलकर क्रान्तिकारी अभियान की शुरुआत की जिसका मुख्य उद्देश्य हिंसक रूप से ब्रिटिश राज को पूर्ण रूप से खत्म करना था.साल 1923 में,भगत सिंह लाहौर में स्थित नेशनल कॉलेज में शामिल हुए जहां उन्होंने दूसरी गतिविधियों में भाग लिया जैसे नाटकीय समाज ,ढोंगीसमाज आदि साल 1923 में भगत सिंह ने पंजाब हिंदी साहित्य सम्मलेन द्वाराआयोजित निबंध स्पर्धा को जीती निबंध का विषय था पंजाब की समस्याए  एक और मुख्य बात बता दे  भगत सिंह कि, वो इटली के "गियूसेप्पे मैज़िनी" अभियान से इतने अधिक प्रभावित हुए थे और उन्होंने साल 1926  में मार्च महीने में नौजवान भारत सभा में" भारतीय राष्टीय युवा संस्थान "की स्थापना कर दी थी .  हिन्दुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन में भगत सिंह इस संस्थान के बाद  शामिल हुए ,हिन्दुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन में  अनेको वीर नेताओ ने हिस्सा लिया इनके प्रमुख थे चंद्रशेखरआज़ाद, रामप्रसादबिस्मिल और शहीदअश्फल्लाहखान.वे कहते है की, “मेरा जीवन किसी श्रेष्ठ अभियान को पूरा करने के लिए हुआ है, और यह अभियान देश को आज़ादी दिलाना है. और इस समय कोई भी व्यक्ति कोई भी प्रलोभन मुझे मेरे लक्ष्य प्राप्ति से नहीं रोक सकता.”युवाओं पर भगतसिंह के प्रभाव को देखते हुए पुलिस ने मई साल 1927 में भगत सिंह कोअपनी हिरासत में ये कहकर लिया कि अक्टूबर माह में साल 1926 में  लाहौर बम धमाके में  वो शामिल थे. भगतसिंहअमृतसर में बिकने वाले उर्दू और पंजाबी अखबारों के लिए लिखते भी थे और उसके संपादक भी थे.


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