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तम्बाकू और सरकार की असमर्थता

15% युवक जानकारी के अभाव में इसके लती हो जाते है अगर तम्बाकू के सेवन से हुई मृत्यु के आंकड़ें देखें तो सबसे ज्यादा मृत्यु (35%) 18 -30 आयुवर्ग के व्यक्ति की होती है तम्बाकू सेवन करने वाले (30-45%) इस लत से मुक्त होना चाहते है पर जानकारी के अभाव में मुक्त नही हो पाते
यह बहुत सरल है कि व्यक्ति बुरी आदत ग्रहण करे और अच्छी आदत को नकार दे किसी भी राष्ट्र के विकास में जितना योगदान जनता का होता है उतना ही योगदान सरकार का होता है आज के समय में मद्यपान, तम्बाकू सेवन, और नशीले पदार्थ का सेवन आदि समस्याएं है धूम्रपान न सिर्फ उस व्यक्ति को नुकसान पहुँचाता है जो यह कर रहा होता है, बल्कि उन सभी को भी नुकसान पहुँचाता है जो उसके आसपास होते है
धूम्रपान के केवल तत्कालिक नुकसान नही होते बल्कि इसके स्थायी दुष्प्रभाव एक पूरी पीढ़ी को शारीरिक रूप से अक्षम बना देते है आंकड़ें बताते है कि हर साल 10 लाख लोग धूम्रपान के कारण मृत्यु का ग्रास बन जाते है; और पचास लाख लोग आजीवन प्रभावित हो जाते है यह स्थिति और दुखद तब हो जाती है जब मृतक या पीड़ित व्यक्ति अपने घर का एकमात्र कमाने वाला सदस्य हो इस प्रकार धूम्रपान प्रतिवर्ष 60 लोगों को भयंकर हानि पहुँचाता है किसी भी राष्ट्र का दायित्व होता है कि वह देश के नागरिकों को उस रास्ते पर जाने से रोके जो उनके और राष्ट्र के लिए नुकसानदेह हो अगर कोई राष्ट्र अपने स्वास्थ्य के लिए 1000 करोड़ खर्च करता है और यदि वह नशीले पदार्थ के व्यसन आदि को त्याग दे तो यह खर्च सिर्फ 500 करोड़ ही रह जायेगा यह भी पूर्ण सत्य है कि सारा दोष सरकार का नही है, उन लोगों का भी है जो निजी स्वार्थ के लिए, देश के भविष्य को दाँव पर लगा देते है

1. सरकारी तंत्र का राजस्व लालच: देश को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से शराब, नशीले पदार्थ, तंबाकू उत्पाद से कर का एक बड़ा भाग प्राप्त होता है अगर तंबाकू मुक्त राष्ट्र बनाना है तो दो कार्य अत्यंत आवश्यक है प्रथम, तमाम नशीले उत्पाद बनाने वाले उद्योगों को बंद कर उनमें जनता के लिए लाभदायक वस्तुओं का उत्पादन किया जाये दूसरा तंबाकू व अन्य नशे जैसे अफीम की खेती पर रोक लगा दी जाये और किसान को अन्य व्यावसायिक फसलों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाये इन कार्यों को अमल में लाना बहुत कठिन है क्योकिं सरकार द्वारा तंबाकू से 12% राजस्व वसूल किया जाता है

 2. निजी स्वार्थ व लोगों का गैर जिम्मेदार होना: - तंबाकू की खेती व इसके उत्पादन के आंकडें कभी भी पूर्णतया सटीक नही होते तंबाकू उत्पादन के बड़े-बड़े उद्योग और फैक्ट्रियों से लिए जाते है जो सिर्फ 90% ही उत्पादन करते है, 10% उत्पादन निजी कारखानों व छोटे-छोटे उद्योगों से किया जाता है, जो किसी भी सरकारी तंत्र की जानकारी से दूर होते हैं

 3. जनता का जागरूक न होना:- भारत सरकार, द्वारा सन 2010 में सार्वजानिक स्थानों पर धूम्रपान पर पाबंदी लगा दी गयी थी परंतु पाँच वर्ष बाद भी इस पाबंदी का कोई प्रभाव नही हैं समाज का एक बड़ा हिस्सा धूम्रपान और तंबाकू सेवन छोड़ना चाहता हैं पर इस बारे में पूर्ण अनभिज्ञ हैं कि वह इस सम्बन्ध में कहाँ से सहायता ले सकता हैं कम आयुवर्ग (15-22) के लोग तंबाकू सेवन को प्रारम्भ करते हैं और इसके दुष्प्रभावों की जानकारी होने पर 85% लोग तंबाकू सेवन छोड़ देते हैं, पर 15% युवक जानकारी के अभाव में इसके लती हो जाते हैं अगर तंबाकू सेवन से हुई मृत्यु के आंकड़ें देखें तो सबसे ज्यादा मृत्यु (35%) 18 -30 आयुवर्ग के व्यक्ति की होती हैं तंबाकू सेवन करने वाले (30-45%) इस लत से मुक्त होना चाहते हैं पर जानकारी के अभाव में मुक्त नही हो पाते, अंततः परिणाम असमय मृत्यु, कैंसर या फेफड़ों की गंभीर बीमारियाँ होती हैं यह तो कड़वा सच हैं कि भारत में हर वर्ष पाँच लाख मौत कैंसर (तंबाकू जनित) से होती हैं अगर जनता को तंबाकू से होने वाली बीमारी व नुकसान की जानकारी दी जाये तो 50 प्रतिशत लोगों की जान बचायी जा सकती हैं

4. तंबाकू सेवन करने वाले व्यक्ति का दुष्पभावों से अनजान रहना: - एक सर्वेक्षण के अनुसार तंबाकू सेवन करने वाले व्यक्तियों में से 30-35% व्यक्ति इसके खतरे के बारे में बिल्कुल नही जानते थे जब इन 35% व्यक्तियों को तंबाकू सेवन के खतरे बताये गई तो इसमें से 60% लोगों ने तंबाकू सेवन को त्याग दिया इसका सिर्फ ये सन्देश हैं कि जानकारी के अभाव में तंबाकू सेवन एक समय काटने (Time Pass) का साधन होता हैं पर जानकारी होने पर लोग इसे पूर्णतया त्याग देते हैं इस सर्वे के बाद सारे संसार के देशों ने अपनी जनता को जागरूक किया और 10% लोगों ने धूम्रपान व तंबाकू सेवन त्याग दिया हैं

 5. सुधार व पुनर्वास कार्यक्रम की अनदेखी करना:- भारत सरकार तंबाकू सेवन करने वाले व्यक्तियों के इलाज व पुनर्वास के कार्यक्रम चलाती हैं पर कुछ स्वार्थी तत्व केवल अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए इन प्रोग्रामों को ठीक से चलने नही देते इस प्रकार सरकार की अच्छी से अच्छी योजना निष्फल हो जाती हैं और इसका बुरा परिणाम देश के आर्थिक व मानव संसाधन पर पड़ता हैं यह भी सत्य हैं कि कर वसूली सरकार की प्राथमिकता बन जाती हैं तो सुधार कार्यक्रम हाशिये पर चले जाते हैं

आज संसार के लगभग सभी देशों में तंबाकू से दूरी बनाने के लिए जनता को जागरूक किया जा रहा हैं ताकि देश की जनता उस देश को विकास की ओर ले जा सके एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण जिम्मेदार और स्वस्थ जनता द्वारा होता हैं पर जहां की जनता कमजोर और बीमार हो तो वह राष्ट्र तो अपने आप ही नष्ट हो जायेगा

तंबाकू एक लत नही हैं बल्कि एक जहर हैं जो धीरे-धीरे किसी राष्ट्र की युवाशक्ति को खोखला कर देता हैं पर निराशा में भी आशा की एक किरण यह हैं कि जनता जागरूक होगी, सरकार जागेगी और अपना महान देश भारत तंबाकू मुक्त होगा 


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