Loading

Enquiry
articale
digital advertising
Contact Form

दादाभाई नौरोजी

दादाभाई नौरोजी 4 सितम्बर साल1825 को मुम्बई में एक गरीब पारसी परिवार में पैदा हुए थे| दादाभाई नौरोजी जब मात्र चार वर्ष के थे तब उनके पिता नौरोजी पलांजी डोरडी की मृत्यु हो गयी।उनका लालन-पालन उनकी माता मनेखबाई ने किया जिन्होंने अनपढ़ होने के बाद भी यह तय किया कि नौरोजी को यथासंभव सबसे अच्छी अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त हो।एक छात्र के तौर पर दादाभाई नौरोजी गणितऔरअंग्रेजी विषयों में बहुतअच्छेथे।उन्होंने मुम्बई के एल्फिंस्टोन इंस्टिट्यूट से अपनी शिक्षा पूरी की तथा शिक्षा पूरी होने पर वही पर बतौर अध्यापक नियुक्त हो गए।दादाभाई एल्फिंस्टोन इंस्टिट्यूट में सिर्फ 27 वर्ष की उम्र में गणित और भौतिकशास्त्र के प्राध्यापक बन गए।किसी विद्यालय में प्राध्यापक बनने वाले वो पहले भारतीय थे।दादाभाई नौरोजी को  ‘ग्रैंडओल्डमैनऑफ़इंडिया’ कहा जाता है ।
दादाभाई ने साल 1852 में राजनीति के क्षेत्र में प्रवेश किया तथा साल1853 में ईस्ट इंडिया कंपनी की लीज के नवीनीकरण का दृढ़तापूर्वक विरोध किया था।इस विषय में उन्होंने ब्रिटिश सरकार को कई याचिकाएं भी भेजी लेकिन ब्रिटिश सरकार ने उनकी दलीलों को नजरअंदाज करते हुए लीज का नवीनीकरण कर दिया।नौरोजी को यह अहसास हुआ कि लोगों की उदासीनता ही भारत पर ब्रिटिश शासन का कारण है।उन्होंने वयस्क युवकों की शिक्षा हेतु ‘ज्ञान प्रसार कमंडली’ की स्थापना की।दादाभाई ने भारत की समस्याओं के विषय में गवर्नर और वायसराय को कई याचिकाएं लिखी ।धीरे-धीरे उन्होंने महसूस किया कि ब्रिटेन के लोगों और संसद को भारत की दुर्दशा के विषय में अवगत कराया जाना चाहिए इसलिए साल 1855 में 30 वर्ष की आयु में वह इंग्लैंड के लिए रवाना हो गए।
इंग्लैंड में नौरोजी ने कई प्रबुद्ध संगठनों से मुलाकात की, कई भाषण दिएऔर भारत की दुर्दशा पर लेख भी लिखे।उन्होंने 1 दिसंबर साल 1866 को ‘ईस्ट इंडिया एसोसिएशन’ की स्थापना की।इस संस्था में भारत के उन उच्च अधिकारियों को शामिल किया गया जिनकी पहुंच ब्रिटिश संसद के सदस्यों तक थी।दादा भाई साल 1892 में सें ट्रल फिन्सबरी सेलिबरल पार्टी के उम्मीदवार के रूप में ब्रिटिश संसद के लिए चुने गए।उन्होंने भारत और इंग्लैंड में एक साथआई सी एस की आरम्भिक परीक्षाओं के लिए ब्रिटिश संसद में प्रस्ताव पारित कराया।उन्होंने भारत और इंग्लैंड के मध्य प्रशासनिक और सैन्य खर्च के विवरण की सूचना देने के लिए विले कमीशन तथा रॉयल कमीशन भी पारित कराया।साल1885 में दादा भाई ने एओह्यूम द्वारा स्थापित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना में अहम भूमिका निभाई।वह तीन बार (सन 1886, सन 1893, सन 1906) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष भी चुने गए।अपने तीसरे कार्यकाल में उन्होंने पार्टी में नरमपंथी और गरमपंथियों के मध्य हो रहे विभाजनकोरो का।कांग्रेस की स्वराज (स्व-शासन) की मांग उनके द्वारा साल 1906 में एक अध्यक्षीय भाषण में सार्वजनिक रूप से व्यक्त की गई।नौरोजी के मुताबिक विरोध का स्वरुपअहिंसकऔर संवैधानिक होना चाहिए। 30 जून साल1917 को 92 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु हो गयी।


Binoculars/Information