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भारत की बेटी नीरजा भनोट

नीरजा भनोट भारत की ही नही, बल्कि पूरे विश्व की बेटी है जिसे हर कोई दिल से याद करता है .मरणोउपरान्त अशोकचक्र से सम्मानित होने वाली नीरजा प्रथम भारतीय महिला रही है. नीरजा भनोट का जन्म पंजाब के चंडीगढ़ में हुआ था .नीरजा के पिता का नाम हरीश भनोट था .तथा माँ का नाम रमा भनोट था. नीरजा की प्रारम्भिक शिक्षा चंडीगढ़ के सेक्रेडहार्ट सीनियर सेकेंडर स्कूल से हुई. नीरजा के पिता हरीश भनोट द हिंदुस्तान टाइम्स ऑफ मुबई में एक पत्रकार के रूप में कार्य करते थे. नीरजा की शादी मात्र 23 साल की उम्र में 1985 में हो गई थी. नीरजा अपने पति के साथ दहेज की मांग के चलते अधिक समय तक नही रह पाई. और शादी के दो माह बाद ही वो अपनी माँ के घर मुम्बई में रहने लगी. वापस लौटने के बाद नीरजा ने पैनऍम 73 में विमान परिचारिका के लिये आवेदन किया. और चुनी भी गई. चुने जाने के बाद नीरजा की ट्रेनिंग मियामी में सम्पन्न हुई .जॉइनिंग के बाद वो अपनी नौकरी को पूरी ईमानदारी से करने लगी. 05 सितम्बर 1986 को प्लेन हाईजैक में पैनऍम फ्लाइट 73 में यात्रियों की सहायता करते समय वो खुद आतंकवादियों की गोलियों का शिकार हो गयी. नीरजा भनोट की इस बहादुरी के लिये भारत सरकार ने उन्हें सर्वोच्च वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया. अभी कुछ समय पहले (2016) भारत की इस बेटी के ऊपर एक फिल्म बनी .इस फिल्म में नीरजा भनोट का किरदार अनिल कपूर की बेटी सोनम कपूर ने निभाया. जिसको लोगो द्वारा बहुत अधिक सराहा गया था .
1 . अब जाने नीरजा भनोट से जुडी विमान हाईजैक की पूर्ण घटना
ये साल1986 की बहुत दुखद घटना है जब मुंबई से अमेरिका जाने के लिए विमान ने उड़ान भरी तो उसी समय पकिस्तान के कराची एअर पोर्ट पर 05 सितम्बर 1986 को विमान को आतंकियों द्वारा हाईजैक कर लिया गया .उस विमान पैनएम फ्लाइट 73 की सीनियर परिचारिका नीरजा भनोट थी. विमान में उस समय कुल 395 लोग सवार थे. (376) यात्री सदस्य संख्या और (19) क्रू सदस्य संख्या. विमान को आतंकवादियो ने हाईजैक इसलिए किया था क्योकि जेल में उनके कुछ सदस्य बन्द थे. जिन्हें वो रिहा कराना चाहते थे. नीरजा ने आतंकवादियों द्वारा विमान अपहरण की सूचना की जानकारी चालक स्थान पर बैठे हुए कर्मचारियों तक पहुँचाने की कोशिश की. लेकिन आतंकवादियों ने नीरजा की चोटी पकड़कर उसे तुरन्त रोक दिया.  फिर भी अपनी समझदारी का परिचय देते हुए उसने code word में सारी सूचनाओ को विमान कर्मचारियों तक पहुचाया .     प्लेन चालक तक नीरजा द्वारा घटना की जानकारी पहुचते ही प्लेन में बैठे पायलट, सह-पायलट और फ्लाइट इंजीनियर विमान को छोड़कर तुरन्त भाग गये. कुछ समय पश्चात सभी यात्रियो से उनके पासपोर्ट को एकत्र करने के लिए कहा गया जिससे आतंकवादी अमेरिकन यात्रियो की पहचान आसानी से कर सके. क्योकि आतंकवादियों का मकसद अमेरिकी यात्रियों को मारना ही था .इसीलिए नीरजा ने अपनी समझदारी का परिचय देते हुए उन सभी 41अमेरिकन के पासपोर्ट को छुपा दिया, नीरजा ने कुछ पासपोर्टों को सीट के नीचे तो कुछ को ढलान वाली जगह पर छुपाया. इस वजह से आतंकी केवल 41 अमेरिकियों में से आतंकी केवल 2 को ही मार सके. आतंकवादियों ने अब पाकिस्तानी सरकार को धमकी दी की या तो पाकिस्तान सरकार विमान में पायलट भेजे या फिर वो ब्रिटिश नागरिक को मार देगे लेकिन पाकिस्तानी सरकार ने विमान में पायलट भेजने से मना कर दिया. उस वक्त बहादुर नीरजा ने ही उन आतंकियो से बात की और ब्रिटिश नागरिक को मरने से बचा लिया.थोड़े समय के बाद ही उस चालू विमान का तेल खत्म हो गया तेल खत्म होते ही विमान में हर तरफ अँधेरा हो गया. अँधेरा होते ही आतंकियों ने प्लेन में गोली चलाना शुरू कर दिया. उस अँधेरे का फायदा उठाते हुए नीरजा ने आपात कालीन द्वार खोल दिया और कई यात्रियों को बिल्कुल सुरक्षित बाहर निकालने की पूरी कोशिश की. नीरजा ने जिस वक्त आपात कालीन द्वार खोला अगर वो चाहती तो द्वार से निकालकर खुद को भी सुरक्षित सकती थी लेकिन नीरजा ने ऐसा भी नही किया और विमान में बचे हुए सभी यात्रियों को सकुशल बाहर निकाला पर बाद में विमान में तीन बच्चे बच गये थे नीरजा ने उन तीनो बच्चो को सुरक्षित बचाने के लिए अपनी जान गवा दी नीरजा को एक गोली उन बच्चो को बचाते समय लगी उनमे से एक बच्चा उस समय मात्र 7 साल का ही था .वह नीरजा की बहादुरी से प्रभावित होकर एयर लाइन में कप्तान बना. केवल 23 साल की आयु में इतनी बहादुरी से उस अकेली महिला ने सभी यात्रियों की जान बचाई. अपने जन्म दिन से दो दिन पहले ही नीरजा शहीद हुई.भारत की इस बेटी पर ना केवल भारत बल्कि पकिस्तान और अमेरिका सभी को गर्व है. क्योकि निडर नीरजा ने ही कई अमेरिकी और पाकिस्तानी लोगो की भी जान बचाई थी. नीरजा भनोट को विश्व भर में“The Heroine of Hijack” के नाम से जाना जाता है अशोक चक्र पाने वाली वह सबसे कम उम्र की भारतीय महिला मरणोउपरान्त नीरजा भनोट ही बनी थी .नीरजा की बहादुरी पर उन्हें विश्वभर में बहुत सम्मान व पुरस्कार प्राप्त हुए.पाकिस्तान सरकार की ओर से नीरजा को तमगा-ए-इंसानियत से  नवाजा गया. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नीरजा भनोट का नाम हेरोइन ऑफ़ हाईजैक के तौर पर बेहद मशहूर है.  2004 में, नीरजा के सम्मान में भारत सरकार ने एक डाक टिकट भी जारी किया और अमेरिका ने वर्ष 2005 में नीरजा को जस्टिस फॉर क्राइम अवार्ड से सम्मानित किया.इसके अलावा नीरजा भनोट की याद में " नीरजा भनोट पैन एम न्यास " संस्था की स्थापना भी हुई .जो नीरजा भनोट की गौरवशाली वीरता को स्मरण करते हुए अदम्य साहस और वीरता हेतु महिलाओ को पुरस्कृत किया जाता है. " नीरजा भनोट पैन एम न्यास " नामक संस्था उनके परिजनों द्वारा स्थापित की गई है जो प्रतिवर्ष दो पुरस्कार प्रदान करती है .जिनमे से एक विमान कर्मचारियों को वैश्विक स्तर पर प्रदान किया जाता है और दूसरा भारत में महिलाओ को विभिन्न प्रकार के अन्याय और अत्याचारों के खिलाफ आवाज़ उठाने और संघर्ष के लिये दिया जाता है . प्रत्येक पुरस्कार की धनराशि 150000 रुपये है साथ ही एक ट्राफी और स्मृति पत्र भी दिया जाता है.इस प्रकार पूरे विश्वभर में नीरजा भनोट की बहादुरी व बहादुरी भरे कामो को सराहा जाता है 
 
 नीरजा भनोट को मरणोउपरांत प्राप्त पुरस्कार इस प्रकार है 
1. नीरजा भनोट को मरणोउपरांत अशोकचक्र, भारत सरकार द्वारा प्रदान किया गया.
2. नीरजा भनोट को मरणोउपरांत फ्लाइट सेफ्टी फाउंडेशन हेरोइस्म अवार्ड, USA द्वारा प्रदान किया गया
3. नीरजा भनोट को मरणोउपरांत जस्टिस फॉर क्राइमअवार्ड, यूनाइटेड स्टेट (कोलंबिया)द्वारा  प्रदान किया गया
4.  नीरजा भनोट को मरणोउपरांत विशेष बहादुरी पुरस्कार, यूनाइटेड स्टेट (जस्टिसविभाग)द्वारा  प्रदान किया गया


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