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सरोजिनी गोविंद नायडु

सरोजिनी नायडु को भारत की प्रथम भारतीय महिला "कांग्रेसी अध्यक्ष" बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ सरोजनी नायडू एक निर्डर, प्रतिभाशाली महिला थी सरोजनी नायडू ने भारत की स्वतंत्रता में अपना अति महत्वपूर्ण योगदान दिया व जेल जाने से भी नही चूकि, ऐसी थी भारत की बेटी स्वर कोकिला सरोजनी नायडू . सरोजनी को स्व र्कोकिला नाम से इसलिए पुकारा जाता है क्योंकि सरोजनी बहुत मधुर गाती थी और बहुत सुन्दर काव्य रचनाएं भी लिखा करती थी. सरोजनी को ये गुण अपनी माँ बरदसुंदरी से मिला था जो काव्य रचनाएं लिखा करती थी
सरोजनी का परिचय एक दृष्टि में
1 . सरोजनी का पूरा नाम सरोजनी गोविन्द नायडू था
2 . सरोजनी का जन्म 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में हुआ था
3 . सरोजनी का पैतृक गांव का नाम ब्रह्म था जो इस समय बंगलादेश के नाम से जाना जाता है
4 . सरोजनी के पिता का नाम डॉ.अघोर नाथ चट्टोपाध्याय था
5 . सरोजनी की माता का नाम बरदसुंदरी था
6 . सरोजनी की शिक्षा को यदि देखा जाए तो साल1891 में जब सरोजनी मात्र12 साल की थी तो उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा में पूरे मद्रास इलाके में प्रथम स्थान प्राप्त किया सरोजनी पढ़ने के लिए इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी केब्रिज में भी गई परन्तु बिना डिग्री लिए वापस भारत लौट आई
7 . सरोजनी का विवाह डॉ. गोविन्द राजुलू से साल,1898 में हुआ जोकि अंतरजातीय विवाह था
8 .सरोजनी का विवाह 19 साल की आयु में हुआ था
9 . सरोजनी स्वत्रंत भारत की प्रथम महिला (उत्तरप्रदेश )राज्यपाल भी रही
10 .सरोजनी की मृत्यु 2 मार्च साल1949 में हुई

साल, 1879 में 13 फरवरी को डॉ. अघोरेनाथ चट्टोपाध्याय और बरदासुंदरी देवी के घर एक नन्ही परी ने जन्म लिया जिसका नाम बड़े प्यार से सरोजनी रखा गया सरोजनी के पिता डॉ . अघोरेनाथ चट्टोपाध्याय, विश्वविद्यालय,में एक वैज्ञानिक और दार्शनिक शास्त्री थे उनकेपिता निजाम कॉलेज के संस्थापक भी थे डॉ.अघोरेनाथ चट्टोपाध्याय ने एडिन बर्घ से विज्ञान वर्ग में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की थी .सरोजनी की माता बरदा सुंदरी देवी एक बंगाली कवयित्री थी. सरोजनी के पैतृक गांव का नाम ब्रह्मं ,बिक्रमपुर था. जो इस वक्त बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है सरोजनी के आठ भाई बहने थी और सरोजनी अपने सभी भाई बहनो में सबसे बड़ी थी सरोजनी का भाई वीरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय एक महान क्रांतिकारी था और दूसरा भाई, हरीन्द्र नाथ कवि, कलाकार, अभिनेता इन सभी भूमिकाओं को निभाया करता था
सरोजनी ने मैट्रिक तक की परीक्षा मद्रास विश्वविद्यालय से प्राप्त की, परन्तु बाद में सरोजनी ने अपनी शिक्षा से 4 साल का लम्बा अंतराल भी लिया सरोजनी को साल,1895 में “निज़ाम शिष्य वृत्ति संस्था” ने इंग्लैंड के पहले किंग्स कॉलेज में पढने का बेहतर अवसर भी दिया जिसे निजाम मीर महबूब अली खान ने बनवाया था और बाद में सरोजनी को गीर्तोंन कॉलेज, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में पढने का भी अवसर भी मिला . 
सरोजिनी नायडू से जुडी कुछ महत्वपूर्ण जानकारिया नीचे दी गई है
1)  मात्र 13 वर्ष की छोटी आयु में ही स्वर र्कोकिला ने 1200  पंक्तियों का खंडकाव्य ‘एले डी ऑफ लेक ’लिखा. 
2) साल 1918 में स्वर र्कोकिला को मद्रास प्रांतीय सम्मेलन का अध्यक्ष चुना गया  
3 ) साल 1930 में सरोजनीनायडू ने महात्मागांधी के सविनय अवज्ञा आंदोलन में पूर्ण रूप से अपना योगदान दिया तथा ‘नमक सत्याग्रह’, का नेतृत्व सरोजिनी नायडू ने बड़े धैर्य के साथ पूर्ण किया. 
4 ) साल1942 में भारतीयों द्वारा चलाया गया आंदोलन अंग्रेजो चले जाओ में सरोजनी ने भाग लिया व उन्हें जेल भी जाना पड़ा 
5 )साल1947 में सरोजनी को दिल्ली में होने वाले एशियाई परिषद् का अध्यक्ष भी चुना गया 
6 )साल 1947 में सरोजनी को स्वतंत्र भारत की प्रथम उत्तरप्रदेश राज्यपाल का पद प्राप्त हुआ .
 
सरोजनीनायडू के प्रसिद्ध ग्रंथ रहे है
द बर्ड ऑफ टाइम,
द गोल्डन थ्रे शोल्ड
द ब्रोकन विंग आदि काव्य संग्रह बहुत प्रसिद्ध हुये .
 
सरोजनीनायडू को 1908 में भारत सरकार की ओर से "केसर ए हिंद " पुरस्कार प्रदान किया गया .
 
 सरोजनीनायडू की कुछ प्रमुख विशेषता है जो नीचे दी गई है
1) भारत की जनता सरोजनी नायडु को ‘भारत की स्वर कोकिला’ के नाम से जानती थी क्योंकि सरोजनी ने काव्य के क्षेत्र में भी अपना अति महत्त्वपूर्ण योगदान दिया था
2) सरोजनीनायडू को प्रथम भारतीय महिला राष्टीय कॉग्रेस अध्यक्ष पद भी प्राप्त हुआ
3) सरोजनीनायडू को प्रथम भारतीय महिला राज्यपाल (उत्तरप्रदेश) का पद भी प्राप्त हुआ


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