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बचपन बचाओ आंदोलन (कैलाशसत्यार्थी)

कैलाश सत्यार्थी ने बचपन बचाओ आंदोलन की शुरुआत की थी जो अब तक 80 हजार से अधिक मासूमों के जीवन को बर्बाद होने से बचा चुके हैं। बाल मजदूरी नाम की कुप्रथा भारत में सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है। कैलाश सत्यार्थी ने इन बच्चों को इस अभिशाप से मुक्त करना ही अपने जीवनका मकसद बना लिया था।कैलाश सत्यार्थी के मुताबिक बाल मज़दूरी महज एक रोग नहीं है, बल्कि कई रोगों की जड़ भी है। इसकी वजह से कई जिन्दिगियां बर्बाद होती हैं। सत्यार्थी जब रास्ते में आते-जाते बच्चों को काम करता देखते थे तो उन्हें बेचैनी होने लगती थी। तब उन्होने नौकरी छोड़ दी और 1980 में "बचपन बचाओ आंदोलन" की नींव रखी।
"बचपन बचाओ आंदोलन" आज भारत के 200 से अधिक जिलों तथा 15 प्रदेशों में सक्रिय है। इसमें आज करीब 70000 स्वयं सेवक हैं जो लगातार मासूमों के जीवन में खुशियों के रंग भरने के लिए कार्य कर रहे हैं। एक आकलन के अनुसार वर्ष 2013 में मानव तस्करी के 1199 मुकदमें दर्ज किये गए थे जिनमें से 10 फीसदी मामले "बचपन बचाओ आंदोलन" की कोशिशों से दर्ज किए गए थे। इस आंदोलन में कैलाश के दो साथी शहीद भी हो चुके हैं। कैलाश सत्यार्थी ने ना सिर्फ बच्चों को मुक्त कराया बल्कि बाल मज़दूरी को समाप्त करने के लिए मज़बूत और कड़ा कानून बनाने की भी ज़ोरदार मांग की थी।सन 1998 में 103 देशों से गुज़रने वाली 'बाल श्रम विरोधी विश्व यात्रा' का आयोजन, और नेतृत्व भी कैलाश सत्यार्थी ने ही किया था।
बचपन बचाओ आंदोलन के अंतर्गत सामान्य तरीके से भी बच्चों को मुक्त कराया जाता हैं और छापेमारी द्वारा भी यह संस्था बच्चों को कानूनी प्रक्रिया से छुड़ाती है और उन्हें पुनर्वास भी उपलब्ध कराती हैं। इसके साथ ही दोषियों को सजा भी दिलवाती हैं। जो बच्चे बिना माता पिता के है उन्हें इस संस्था द्वारा संचालित किये जाने वाले आश्रम में भेजा जाता है। कैलाश सत्यार्थी का कहना है कि किसी भी देश में बाल मज़दूरी की मुख्य वजह है 1.निर्धनता,2. अशिक्षा, 3.सरकारी उदासीनता 4. क्षेत्रीय असंतुलन।
बचपन बचाओ आंदोलन के निर्माता कैलाश सत्यार्थी एक भारतीय बाल अधिकार कार्यकर्ता और बाल-श्रम के खिलाफ हैं।उन्होंने सन 1980 में बचपन बचाओ आन्दोलन की स्थापना की जिसके पश्चात वे सम्पूर्ण विश्व के 144 देशों के 83,000 से अधिक बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम कर चुके हैं।  सत्यार्थी के कामों की वजह ही सन 1999 में अंतरराष्ट्रीय श्रम संघ के द्वारा बालश्रम की निकृष्टतम श्रेणियों पर संधि सं॰ 182 को अंगीकृत किया गया था, जो अब विश्वभर की सरकारों के लिए इस क्षेत्र में एक मुख्य मार्ग निर्देशक है।
कैलाश सत्यार्थी को और उनके कामों को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय तथा राष्ट्रीय सम्मानों व पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। इन पुरस्कारों में 2014 में प्राप्त नोबेल शान्ति पुरस्कार भी शामिल किया गया है जो उन्हें पाकिस्तान की नारी शिक्षा की पक्षधर व कार्यकर्ता मलाला युसुफ़ ज़ई के साथ सम्मिलित रूप से प्रदान किया गया था
कैलाश सत्यार्थी को मिलने वाले पुरस्कार व सम्मान निम्नलिखित है ---
साल 2015 :हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित "ह्युमेनीटेरियन पुरस्कार "  से सम्मानित। यह पुरस्कार पाने वाले सत्यार्थी भारत के पहले व्यक्ति है. 
साल  2014: नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त हुआ 
साल  2009: डिफेण्डर्स ऑफ डेमोक्रैसी पुरस्कार (अमेरिका) प्राप्त किया था 
साल  2008: अल्फांसो को मिन अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार (स्पेन) द्वारा प्रदान किया गया था 
साल  2007: इटली के सिनेट का स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ 
साल  2007: अमेरिका के स्टेट विभाग द्वारा 'आधुनिक दासता को खत्म करने हेतु कार्यरत नायक' का सम्मान प्राप्त किया 
साल 2006: फ्रीडम पुरस्कार (US) प्राप्त किया गया था  
साल 2002: वालेन बर्ग मेडल (मिशिगन विश्वविद्यालय द्वारा प्रदत्त) प्रदान किया गया था 
साल 1998: गोल्डेन फ्लैग पुरस्कार (नीदर लैण्ड्स)  प्रदान किया गया था 
साल 1995: ट्रम्पेटर पुरस्कार (अमेरिका) दिया गया था 
साल 1993: अशोक फेलो चुने गये था। 


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