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भारत में रविवार की छुट्टी का इतिहास

वैसे तो विश्व में रविवार की छुट्टी की शुरुआत 1843 में हुई थी किन्तु भारत में इसकी शुरुआत वर्षों पश्चात हुई थी, वर्तमान में हमलोग रविवार को छुट्टी के दिन के रूप में मनाते है लेकिन क्या आपको इसके पीछे की वजह पता है क्यों सिर्फ रविवार को ही भारत में सार्वजनिक अवकाश के रूप में घोषित किया गया है, इसके पीछे एक लंबा संघर्ष हुआ था और साथ ही कई दुर्घटनाएं भी घटी, आईये हम आपको रविवार को अवकाश के रूप में घोषित करने की वजह बताते है-
ब्रिटिश शासन के दौरान मिल मजदूरों को सातों दिन कार्य करना पड़ता था और इन्हें कोई अवकाश नही मिलता था, उस वक्त ब्रिटिश अधिकारी प्रार्थना करने के लिए हर रविवार को चर्च में जाया करते थे लेकिन मजदूरों के लिए ऐसा कोई नियम या परम्परा नही थी उन दिनों मिल मजदूरों के एक नेता थे जिनका नाम श्री नारायण मेधाजी लोखंडे था उन्होंने ही अंग्रेजों के सामने साप्ताहिक छुट्टी का प्रस्ताव रखा और कहा कि हमलोग खुद के लिए और अपने परिवार के लिए 6 दिन कार्य करते है, अतः हमे एक दिन अपने देश की सेवा करने के लिए मिलना चाहिए और हमें अपने समाज के लिए कुछ विकास के कार्य भी करने चाहिए और इसके साथ ही उन्होंने मजदूरों से कहा कि रविवार हिन्दू देवता खंडोबा का दिन है और इसलिए इस दिन को साप्ताहिक अवकाश के रूप में घोषित ज़रूर किया जाना चाहिए लेकिन उनके प्रस्ताव को ब्रिटिश अधिकारियों ने अस्वीकार कर दिया था इसके बाद भी लोखंडे ने अपनी कोशिश जारी रखी और 7 वर्ष पश्चात 10 जून, 1890 को ब्रिटिश सरकार ने आखिरकार रविवार को अवकाश का दिन घोषित कर दिया और हैरानी की बात है कि भारत सरकार ने कभी भी इस अवकाश के  विषय में कोई आदेश जारी नही किये है,


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