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भारत के राष्ट्रीय जलमार्ग (Waterways)

जल परिवहन किसी देश को सबसे ज्यादा सस्ता यातायात प्रदान करता है क्योंकि इसमें केवल परिवहन के साधनों से ही यातायात किया जाता है। किन्तु इसके लिए प्राकृतिक या कृत्रिम जलपूर्ण मार्ग जरूरी होते हैं। हमारे देश में आन्तरिक व सामुद्रिक दोनों तरह का जल परिवहन किया जाता है। आन्तरिक जल परिवहन की दृष्टि से, देश में प्राचीनकाल से ही नदियों की सहायता से यातायात किया जाता रहा है। अब देश में करीब 14,500 किमी0 लम्बा नौगम्य जलमार्ग है, जिसमें नदियाँ, नहरें, अप्रवाही जल जैसे झील आदि संकरी खाड़ियां भी शामिल हैं। भारत की प्रमुख नदियों में 3,700 किमी0 लम्बे मार्ग का ही इस्तेमाल किया जाता है। वर्तमान समय में आन्तरिक जल परिवहन के माध्यम से करीब 160 लाख टन माल की ढुलाई हर साल की जाती है। आज भी देश में गंगा, यमुना, हुगली, ब्रह्मपुत्र, नर्मदा, ताप्ती, माण्डवी, गोदावरी, कृष्णा व महानदी जैसी नदियों के द्वारा आन्तरिक जलमार्ग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। गंगा, भागीरथी, हुगली नदी प्रणाली के हल्दिया, इलाहाबाद खण्ड को 22 अक्टूबर 1986 में, राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया जा गया, जिसके विकास एवं प्रबन्धन का पूर्णदायित्व केन्द्र सरकार के हाथों में है। इसके लिए सम्पूर्ण मार्ग को 3 उपखण्डों में विभक्त किया गया है।

1. हल्दिया-फरक्का
2. फरक्का-पटना
3. पटना-इलाहाबाद 
इसके साथ ही 26 दिसम्बर, 1980 में, ब्रह्मपुत्र नदी की सादिया-धुबरी सीमा को राष्ट्रीय जलमार्ग सं. 2 घोषित किया गया था। केंद्र सरकार द्वारा पश्चिमी तटीय नहर, केरल के कोल्लम-कोट्टपुरम क्षेत्र को व चम्पकारा और उद्योगमण्डल नहरों को भी राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित करने का निर्णय लिया गया।

भारत में अन्तर्देशीय जलमार्गों का विकास
भारत में 27 अक्टूबर 1986 में, भारतीय अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की स्थापना की गई। 1987 में, केन्द्रीय अन्तर्देशीय जल परिवहन निगम की स्थापना सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थान के रूप में की गई। इसका मुख्यालय कोलकाता में स्थित हैं। इसके द्वारा बांग्लादेश होकर कोलकाता व असम के मध्य, इल्दिया-पटना जलमार्ग की परिवहन सेवाओं का प्रबन्धन किया जाता है।
भारत के राष्ट्रीय जलमार्ग
NW- 1     इलाहबाद से हल्दिया (पश्चिम बंगाल)     1620 किमी.         1986
NW- 2     हल्दिया से धुबरी (ब्रह्मपुत्र नदी)     891 किमी.            1988
NW- 3     झेलम से कोट्टापुरम (केरल)             205 किमी.            1993
NW- 4     काकीनाडा से मखकानम (गोदावरी तथा कृष्णा नदी क्षेत्र)  1100 किमी.     

भारत के राष्ट्रीय जलमार्गों के विकास तथा रखरखाव का उत्तरदायित्व इनलैण्ड वाटरवेज अथॉरिटी ऑफ इण्डिया का है। इसके साथ ही देश की मुख्य भूमि की 5,600 किमी0 लम्बी तटरेखा पर 11 बड़े, 139 छोटे बन्दरगाह हैं। बड़े बन्दरगाहों का नियन्त्रण केन्द्र सरकार द्वारा किया जाता है, साथ ही छोटे व मझोले बन्दरगाह संविधान की समवर्ती सूची में भी शामिल हैं, जिनका प्रबन्धन और प्रशासन सम्बन्धित राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है।


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