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अमेरिकी चुनावी प्रक्रिया(President)

अमेरिका में भी अन्य देशों की तरह राष्ट्रपति पद के लिए  केवल अमेरिकी नागरिक ही मतदान करते हैं.अमेरिकी चुनावी  प्रक्रिया बहुत लंबी होती है.विशेषज्ञों के अनुसार राष्ट्रपति पद की चुनावी प्रक्रिया वर्षों से सिर्फ दो ही पार्टियों डेमोक्रेटिक तथा रिपब्लिक के इर्द गिर्द घूमती है.पिछली बार अमेरिकी चुनाव 6नवबंर को हुआ था, लेकिन इसकी शुरुआत प्राइमरी इलेक्शन से ही हो जाती है.प्राइमरी का अर्थ है जब अमेरिका के दो राजनीतिक दल रिपब्लिकन तथा डेमोक्रेटिक पार्टी राष्ट्रपति पद के लिए अपने-अपने उम्मीदवारों का चयन करती हैं और फिर आधिकारिक रूप से अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा करती हैं.अमेरिकी राष्ट्रपति पद का चुनाव दो चरणों में विभाजित होता है,प्राइमरी तथा आम चुनाव. विभिन्न राज्यों में प्राइमरी चुनाव के माध्यम से पार्टियां अपने सबसे प्रबल दावेदार का पता लगाती हैं.अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिये कोई दो बार से ज्यादा चुनाव नहीं लड़ सकता तथा डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ मौजूदा राष्ट्रपति बराक ओबामा के मैदान में होने की वजह से इस पार्टी की ओर से कोई प्राइमरी इस बार नहीं हुई, लेकिन रिपब्लिकन पार्टी की कई प्राइमरी हुई थी.जिसमें मिटरोमनी सबसे प्रबल दावेदार बनकर उभरे थे.अमेरिका चुनाव में प्राइमरी चुनाव का चरण पूर्ण हो चुका है. प्राइमरी चुनाव को राष्ट्रपति चुनाव से पूर्व की प्रक्रिया के रूप में समझा जा सकता है. इसके अंतर्गत रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी अपने-अपने उम्मीदवार चुनते हैं. इसके लिए सब राज्य अपने अपने तरीकों से चुनाव कराते हैं. अमेरिका में प्राइमरी चुनाव भी दो प्रकार से होता है,पहला-प्राइमरी, तथा दूसरा कॉकस.प्राइमरी तरीका अधिक परंपरागत है और ज्यादातर राज्यों में इसे ही अपनाया जाता है. इसमें आम नागरिक भाग लेते हैं और पार्टी को बताते हैं कि,उन्हें कौन सा उम्मीदवार पसंद है.वही, कॉकस चुनाव प्रक्रिया का इस्तेमाल अधिकतर उन राज्यों में होता है,जहां पार्टी के गढ़ होते हैं. कॉकस में अधिकतर पार्टी के पारंपरिक मतदाता ही भाग लेते हैं.जैसे-कि, इस बार प्राइमरी चुनाव की शुरुआत कॉकस प्रक्रिया से हुई थी और सबसे पहले कॉकस चुनाव अयोवा प्रांत  में हुआ था.अमेरिका में दो ही प्रमुख राजनीतिक दल हैं : डेमोक्रेट और रिपब्लिक साल1869 से देश का राष्ट्रपति इन्हीं दो प्रमुख पार्टियों का रहा है.कांग्रेस की 535 सीटों में से533 सीटों पर इन्हीं दोनों दलों का कब्जा है. इस वक्त सीनेट में डेमोक्रेट्स का तो प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन का कब्जा है.प्रत्येक राज्य के मतदाता अपने अपने उम्मीदवार के डेलीगेट के नाम मतदान करते हैं और फिर वो डेलीगेट अपनी अपनी पार्टी नेशनल कन्वेंशन में इकट्ठा होते हैं और सभी राज्यों से जिस प्रत्याशी के डेलीगेट अधिक होते हैं उसे उम्मीदवार घोषित कर दिया जाता है. इलेक्शन -डे रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी प्राइमरी चुनाव के माध्यम से अपने अपने उम्मीदवार चुनते हैं और पार्टी की नेशनल कन्वेंशन में आधिकारिक रूप से अपने अपने प्रत्याशियों की घोषणा करते हैं.साधारण तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव का प्राइमरी इलेक्शन फरवरी से मार्च के मध्य होता है और फिर कुछ सप्ताह के पश्चात ही पार्टियां उम्मीदवार का ऐलान कर देती हैं. यहां से चुनाव प्रचार आरम्भ होता  है और फिर इलेक्शन डे आता है,जोकि,सुपर ट्यूसडे को ही होता है. सुपरट्यूस-डे अमेरिकी चुनाव की परंपरा से जुड़ा है और ये नवंबर के पहले सप्ताह में आता है. इस दिन ही राष्ट्रपति चुनाव होता है. जैसे पिछली बार 6 नवबंर को मंगलवार के दिन अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव हुआ था.साल2012 में चुनाव की सभी प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी और अंतिम दौर का प्रचार चल रहा था, इसके पश्चात इलेक्शन-डे 6 नवंबर को ओबामा और रोमनी की किस्मत का फैसला हुआ.और जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 270 वोट की आवश्यकता थी. बराक ओबामा देश के 43वें राष्ट्रपति हैं और अभी तक का इतिहास बताता है कि,अभी तक 20राष्ट्रपति दोबारा से राष्ट्रपति के पद पर बैठने में सफल रहे हैं.प्राइमरी इलेक्शन अपनी पार्टी में उम्मीदवारी की रेस जीतने के पश्चात जब दोनों प्रत्याशी इलेक्शन डे में आमने सामने आते हैं और जनता उन्हें वोट देती है. इलेक्शन डे के वोट करने की प्रक्रिया   भी प्राइमरी जैसा ही है.जैसे वहां डेलीगेट चुने जाते हैं ठीक उसी तरह ही इलेक्शन डे में इलेक्टर्स चुने जाते हैं. इसे इलेक्टोरल कॉलेज कहा जाता है यानी ऐसा समूह जिसे अमेरिकी जनता चुनती है  और फिर वो राष्ट्रपति की जीत की घोषणा करते हैं.अमेरिकी इलेक्टोरल कॉलेज में 538 इलेक्टर्स होते हैं. अब प्रश्न ये आता है कि, यह संख्या 538 ही क्यों होती है, दरअसल,ये संख्या अमेरिका के दोनों सदनों की संख्या का जोड़ है. अमेरिकी सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स यानी प्रतिनिधि सभा तथा सीनेट का जोड़ है.प्रतिनिधि सभा में 435सदस्य होते हैं,जब किसी नेट में100 सांसद मौजूद  होते है. इन दोनों सदनों की संख्या कुल मिलाकर 535 होती है. अब इसमें 3 सदस्य और जोड़े जाते है और ये तीन सदस्य आते हैं अमेरिका के 51वें कोलंबिया राज्य से. इस प्रकार कुल538 इलेक्टर्स द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति चुना जाता हैं. इस बार हिलेरी क्विंटन डेमोक्रेट तथा डोनाल्ड ट्रम्प रिपब्लिकन पार्टी से है और इनकाचुनाव 8 नवम्बर को होना है अमेरिका के नागरिक ही मतदान कर सकते हैं.अमेरिकी चुनाव की प्रक्रिया बहुत लंबी होती है. विशेषज्ञों के अनुसार राष्ट्रपति पद के चुनाव वर्षों से सिर्फ दो ही पार्टियों डेमोक्रेटिक तथा रिपब्लिक के इर्द-गिर्द ही घूमती है.पिछली बार अमेरिकी चुनाव 6 नवबंर को हुआ था. लेकिन इसकी शुरुआत प्राइमरी इलेक्शन से हो जाती है. प्राइमरी का अर्थ है जब अमेरिका के दो राजनीतिक दल रिपब्लिकन तथा डेमोक्रेटिक पार्टी राष्ट्रपति पद के लिए अपने-अपने उम्मीदवारों का चयन करती हैं और फिर आधिकारिक रूप से अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा करती हैं.अमेरिकी राष्ट्रपति पद का चुनाव दो चरणों में विभाजित होता है,प्राइमरी तथा आम चुनाव. विभिन्न राज्यों  में प्राइमरी चुनाव के माध्यम से पार्टियां अपने सबसे प्रबल दावेदार का पता लगाती हैं. अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिये कोई दोबार से ज्यादा चुनाव नहीं लड़ सकता है और डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से मौजूदा राष्ट्रपति बराक ओबामा के मैदान में होने की वजह से इस पार्टी की ओर से कोई प्राइमरी इस बार नहीं हुई, लेकिन रिपब्लिकन पार्टी की कई प्राइमरी हुई थी, जिसमें मिटरोमनी सबसे प्रबल दावेदार बनकर उभरे थे.अमेरिका चुनाव में प्राइमरी चुनाव का चरण पूर्ण हो चुका है. प्राइमरी चुनाव को राष्ट्रपति चुनाव से पूर्व की प्रक्रिया के रूप में समझा जा सकता है. इसके अंतर्गत रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी अपने-अपने उम्मीदवार चुनते हैं. इसके लिए सब राज्य अपने अपने तरीकों से चुनाव कराते हैं. अमेरिका में प्राइमरी चुनाव भी दो प्रकार से होता है,पहला-प्राइमरी, तथा दूसरा कॉकस. प्राइमरी तरीका अधिक परंपरागत है और ज्यादातर राज्यों में इसेही अपनाया जाता है. इसमें आम नागरिक भाग लेते हैं और पार्टी को बताते हैं कि,उन्हें कौन सा उम्मीदवार पसंद है. वही, कॉकस चुनाव प्रक्रिया का इस्तेमाल अधिकतर उन राज्यों में होता है, जहां पार्टी के गढ़ होते हैं. कॉकस में अधिकतर पार्टी के पारंपरिक मतदाता ही भाग लेते हैं. जैसे कि इस बार प्राइमरी चुनाव की शुरुआत कॉकस प्रक्रिया से हुई थी और सबसे पहले कॉकस चुनाव अयोवा प्रांत में हुआ था. अमेरिका में दो ही प्रमुख राजनीतिक दल हैं : डेमोक्रेट और रिपब्लिकसन 1869 से देश का राष्ट्रपति इन्हीं दो प्रमुख पार्टियों का रहा है.कांग्रेस की 535 सीटों में से 533 सीटों पर इन्हीं दोनों दलों का कब्जा है.इस वक्त सीनेट में डेमोक्रेट्स का तोप्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन का कब्जा है.प्रत्येक राज्य के मतदाता अपने अपनेउम्मीदवार के डेलीगेट के नाम मतदान करते हैं और फिर वो डेलीगेट अपनी अपनी पार्टी नेशनल कन्वेंशन में इकट्ठा होते हैं और सभी राज्यों से जिस प्रत्याशी के डेलीगेट अधिक होते हैं उसे उम्मीदवार घोषित कर दिया जाता है. इलेक्शन डेरिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी प्राइमरी चुनाव के माध्यम से अपने अपने उम्मीदवार चुनते हैं और पार्टी की नेशनल कन्वेंशन में आधिकारिक रूप से अपने अपने प्रत्याशियों की घोषणा करते हैं.
साधारण तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव का प्राइमरी इलेक्शन फरवरी से मार्च के मध्य होता है और फिर कुछ सप्ताह के पश्चात ही पार्टियां उम्मीदवार का ऐलान कर देती हैं. यहां से चुनाव प्रचार आरम्भ होता है और फिर इलेक्शन डे आता है, जोकि सुपर ट्यूसडे को ही होता है. सुपर ट्यूसडे अमेरिकी चुनाव की परंपरा से जुड़ा है और ये नवंबर के पहले सप्ताह में आता है. इस दिन ही राष्ट्रपति चुनाव होता है. जैसे पिछली बार 6 नवबंर को मंगलवार के दिन अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव हुआ था.2012चुनाव की सभी प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी और अंतिम दौर का प्रचार चल रहा था, इसके पश्चात इलेक्शन डे यानी 6 नवंबर को ओबामा और रोमनी की किस्मत का फैसला हुआ. और जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 270 वोट की आवश्यकता थी. बराक ओबामा देश के 43वें राष्ट्रपति थे.और अभी तक का इतिहास बताता है कि 20 राष्ट्रपति फिर से राष्ट्रपति पद पर सत्तासीन होने में सफल रहे हैं. प्राइमरी इलेक्शन यानी अपनी पार्टी में उम्मीदवारी की रेस जीतने के पश्चात जब दोनों प्रत्याशी इलेक्शन डे में आमने-सामने आते हैं और जनता उन्हें वोट देती है. इलेक्शन -डे के मतदान का तरीका भी प्राइमरी के जैसा ही है.जैसे वहां डेलीगेट चुने जाते हैं ठीक वैसे ही इलेक्शन-डे  में इलेक्टर्स चुने जाते हैं. इसे इलेक्टोरल कॉलेज कहा जाता है यानी,ऐसा समूह जिसे अमेरिकी जनता चुनती है और फिर वो राष्ट्रपति की जीत की घोषणा करते हैं.अमेरिकी इलेक्टोरल कॉलेज में 538 इलेक्टर्स होते हैं. अब प्रश्न ये आता है कि,यह संख्या 538 ही क्यों होती है, दरअसल ये संख्या अमेरिका के दोनों सदनों की संख्या का जोड़ है. अमेरीकी सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स यानी प्रतिनिधि सभा तथा सीनेट का जोड़ है. प्रतिनिधि सभा में 435 सदस्य होते हैं, जबकि सीनेट में 100 सांसद होते है .इन दोनों सदनों की संख्या कुल मिलाकर 535 होती है. अब इसमें 3 सदस्य और जोड़ है और ये तीन सदस्य आते हैं अमेरिका के 51वें कोलंबिया राज्य से. इस प्रकार कुल 538 इलेक्टर्स द्वारा अमेरिकी राष्ट्पति चुना जाता हैं. इस बार हिलेरी क्विंटन डेमोक्रेट तथा डोनाल्ड ट्रम रिपब्लिकन पार्टी से है और इनका चुनाव 8नवम्बर को होना है


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