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स्कूल की मनमानी

अभी गुडगाँव के रेयान पब्लिक स्कूल में बच्चे की मौत हो गयी, गाजियाबाद में एक बच्चे की स्कूल बस से उतरते समय बस ड्राइवर की लापरवाही से मौत हो गयी तथा दिल्ली के एक स्कूल में मासूम बच्ची से रेप का केस सामने आया है|  ऐसी घटनाएं देखने से ऐसा लगता है कि जितने भी पब्लिक स्कूल है वो बच्चों की शिक्षा एवं सुरक्षा पर ध्यान न देकर केवल पैसे बनाने पर ध्यान देते है | इन मासूमों की क्या गलती है कि वो पढ़ाई के लिए गए तथा उनको मौत से सामना करना पड़ा |  इसका सीधा सा मतलब ये होता है कि स्कूल केवल अभिभावकों से पैसा वसूलते है, लेकिन बच्चों को अच्छी पढाई और सुरक्षा देने में नाकाम होते है | बच्चों के साथ ऐसी घिनौनी हरकतें होती रहती है | आये दिन ऐसे समाचार मिलते रहते है | बच्चों के प्रति बढ़ते अपराध हमारी छोटी और तुच्छ मानसिकता को प्रदर्शित कर रहा है | ऐसे अपराध स्कूल, कॉलेज से नहीं बल्कि बाबाओं के तरफ से भी आ रहे है | जिसमे जो लोग नैतिकता का पाठ पढ़ाते है, वे खुद ऐसी गन्दी हरकत में सम्मिलित पाये जाते है | 
 
स्कूल कॉलेजों को बच्चों की उचित सुरक्षा एवं शिक्षा की व्यवस्था करने की जरुरत रहती है | लेकिन ये आधुनिक स्कूल कॉलेज पैसा जमा करने के चक्कर  में बच्चों के साथ खिलवाड़ करते है तथा उनका भविष्य चौपट कर देते है | स्कूल कॉलेजों को यह सोचना चाहिये कि बच्चों की उचित देखभाल से हमारा आने वाला भविष्य उज्जवल होगा तथा लोगों के बीच एक अच्छा सन्देश जायेगा | 
 
आज सरकार की ऐसी गाइड होनी चाहिए कि जो भी स्कूल में शिक्षक, गार्ड, प्रिंसिपल, ड्राइवर एवं अन्य लोग होते है, उनका पुलिस वैरिफिकेशन होना चाहिए, जिससे कोई भी अपराधी किस्म का आदमी स्कूल का स्टाफ न बन जाए | बच्चों की सुरक्षा का विशेष ध्यान देते हुए स्कूल के CCTV कैमरे को मजबूत करने की जरुरत होती है, जिससे कोई भी गलत कार्य बच्चों के साथ न हो सके | लेकिन स्कूल प्रशासन की गलती ही कैमरे में रिकॉर्ड हो जाएगी, इसलिए स्कूल प्रशासन कैमरे को लगाता है, लेकिन जब फसने की बारी आती है तो सबूत को नष्ट करवा देता है | 
 
जब भी स्कूल को मान्यता दी जाए तो उसकी सुरक्षा को विशेष ध्यान देने की जरुरत पड़ती है, जिससे समय समय पर एक कमेटी स्कूल की सुरक्षा की निगरानी करता  रहे तथा कुछ  भी लापरवाही पायी जाये तो स्कूल की मान्यता रद्द की जा सके | 
 
इन मासूमो के साथ खिलवाड़ हमारी सरकार द्वारा बनाई गयी नीतियों से होता है | क्योंकि नीतियां बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में न रखकर बल्कि स्कूल के पैसे कमाने को रखकर  बनाई जाती है |  जब तक स्कूल में पैसे का खेल ऐसे ही चलता रहेगा तो शायद ऐसे वारदातें होती रहेंगी | क्योंकि कॉलेज प्रशासन का बच्चों की सुरक्षा पर ध्यान नहीं रहेगा, बल्कि धन उगाही पर विशेष ध्यान दिया जायेगा | बच्चों पर बढ़ते अपराध को कॉलेज की नीतियों को बदलकर काम किया जा सकता है | कॉलेज प्रशासन पैसे बचाने के चक्कर में ऐसे लोगों को नियुक्त्त करता है जो कम पैसे पर तैयार हो जाये | 
 बच्चों की  उचित शिक्षा को ध्यान में रखने की जरुरत है, लेकिन उचित शिक्षा तो अच्छे शिक्षक से ही मिल सकती है | बच्चे देश का भविष्य होते है | देश के भविष्य को हम उचित एवं नैतिक शिक्षा देकर बचाया जा सकता है, लेकिन दुर्भाग्य है कि देश के भविष्य से आज धन उगाही एवं भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के सिवा कुछ नहीं कर रहे है |  यदि हम बच्चों से धन उगाही करेंगे तो यह हमें समझना चाहियें कि आने वाला हमारा भविष्य  कैसा होगा | जो यह देख रहे है कि शिक्षा का मन्दिर है वहा कैसे धन उगाही होती है | स्कूल कॉलेजों को धन उगाही का केन्द्र न बनाकर हमे शिक्षा के मंदिर के रूप विकसित करने की जरुरत होती है | जिससे हमारा आने वाला भविष्य उज्ज्वल हो तथा देश का समुचित विकास हो सके | यदि भारत के शिक्षा के मंदिर में ऐसे ही धन उगाही के केन्द्र रहेंगे तो यही हाल होगा | क्योंकि बड़े राजनीतिज्ञ एवं माफिया तरह के लोग इसमें अपना पैसा लगाकर चांदी काटने का कार्य कर रहे है | 
                                                                                                                                                                     
 
 
   डॉ अजय कुमार चतुर्वेदी   

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