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हर मिनट 30 लोग छोड़ रहे है गांव

  एक आकड़े के अनुसार हर मिनट भारत में 30 लोग गांव छोड़कर शहर में बस रहे है तथा 2050 तक भारत की आधी जनसंख्या शहर में होगी . यानी अभी शहरी जनसंख्या 31 % है , 2050  तक यह 50 % हो जाएगी . आज भी भारत 5 साल के कम उम्र 42 % बच्चे कुपोषण के शिकार है . आज भारत में 30 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे का जीवन जी रहे है . इसको देखने से तो यही लगता है कि आज के भारत में कितनी आधारभूत सुविधाओं की कमी है.  लोग गांव को छोड़ कर शहर की तरफ रुख कर रहे है . लोगों के  रोजगार के कम होते साधन एवं उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य ऐसे मुख्य समस्या है कि लोग शहर की तरफ रुख कर रहे है . आज भी भारत में शहरी जनसंख्या वृद्धि होने का कारण अच्छे जीवन स्तर  की चाहत है . 
                       इसको देखते हुए शहरों की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की जरुरत है . लेकिन यह सोचना चाहिए कि जो लोग गांव छोड़कर शहर की तरफ रुख कर रहे है . उनकी मूल समस्या क्या है क्योंकि छोटे होते परिवार , सामाजिक सदभाव का आभाव एवं भौतिक सुख- सुविधा के कारण लोग गावों से पलायन कर रहे है . वैसे भी भारत गावों का देश कहा जाता है . क्योकि भारत में लोग गावो में बसते है . लेकिन इस पलायन की वजह शहर एवं गावों की समस्या में इजाफा होगा , क्योकि प्रवास से यदि किसी समस्या का निदान होता है तो अन्य समस्या बढ़ती है . सरकार को गावों की मजबूत आधारभूत ढांचे को विकसित करना चाहिये , जिससे गांव की जनसंख्या को गांव में ही रोका जा सके .
                        आज भी हम अपने गांव की  चीन से तुलना करे तो पाते है कि आज जहां चीन के गावों में 24 घंटे बिजली रहती है वही हमारे गांव बिजली की कमी को झेल रहे है . हम लोग अभी यह देखते है की आज भारत के गावों से अधिकतर युवा पलायन कर रहा है . गावों में आज बड़े- बूढ़े लोग ही रहे है . स्वास्थ्य सुविधाओं की भी काफी कमी पाई जाती है . जिसको देखते हुए लोग शहरों की तरफ रूख कर रहे है. आदमी की आवश्कताओं की पूर्ति कर दे तो बढ़ते पलायन को काफी हद तक रोका जा सकता है . अच्छी सड़क का निर्माण , लोगों की अच्छी शिक्षा , स्वास्थ्य जैसी सुविधा यदि आसानी से गावों में मुहैया करायी जाये तो यह समस्या काफी हद तक कम की जा सकती है . यदि गावों की जनसंख्या शहर की तरफ बढ़ेगी तो शहर को  भी काफी समस्याओ से सामना करना पड़ सकता है . जैसे की हमारे शहर में आज आधारभूत सुविधाओं की कमी है . जैसे सीवरलाइन रोड , फ्लाईओवर  , घर की समस्या आदि, मुख्य समस्याएं है . 
                        भारत की संस्कृति एवं सभ्यता गावों में रहती है तथा यह कहा जाता है कि  भारत की आत्मा गावों में निवास करती  है .  हमे गावों को विकसित करना चाहिए  जिससे हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचा सके . क्योंकि  भारत एक कृषि प्रधान देश है तथा कृषि का उत्पादन गावो में होता है , यदि हम शहरी करण को बढ़ावा देते है, तो हमारे गांव कम हो जायेंगे तथा अपनी सांस्कृतिक  विरासत को खत्म कर देंगे . गावों के विकास के लिए हमे गांव में रोजगार के साधनो को अधिक विकसित करने की जरुरत होगी जिससे वहाँ के लोगों का जीवन स्तर अच्छा हो सके . आज भी गावों में स्वास्थ्य सुविधाओं का काफी आभाव पाया जाता है . जितने भी प्राथमिक चिकित्सालय है, वहाँ पर डॉक्टर की व्यवस्था नहीं है . गांव की खराब स्वास्थ्य सुविधा भी गांव के पलायन का मुख्य कारण है .
                        आज भी भारत के गांव प्राकृतिक एवं खनिज संसाधनों से समृद्ध है , जिसका हमारी सरकारे सही से दोहन नहीं कर पायी . यदि  दोहन किया भी तो, उसका फायदा सीधा शहरों को  या पूंजी-पतियों को पहुंचाया गया , जिससे आज गांव के लोगों को आधारभूत सुविधाओं से महरूम होना पड़ रहा है .यदि गावों के प्राकृतिक  संसाधनों का दोहन करके गावों का विकाश किया जाये तो यह गांव के लिए ही अच्छा होगा .क्योंकि आज हम बात शहरों की करें तो जितने भी शहर है वहाँ स्ट्रेस लेबल , प्रदूषण  की मात्रा काफी अधिक है ,  जबकि गावों में ऐसा नहीं है . क्योंकि गांव में वाहनों का अधिक दबाव , एवं औद्योगिक करण  कम होने से प्रदूषण कम है . गावों का विकास गांव की  उचित देख - रेख से संभव हो पायेगा , जिससे लोगों का जीवन-स्तर  अच्छा विकसित हो जायेगा  . आज भी हम लोग घूमने के लिए यूरोपीय देशों की तरफ रूख करते है , लेकिन आज हम देखे तो पाते है , कि गांव उससे भी ज्यादा अच्छे है , यदि गांव के टूरिज्म को विकसित करें तो अच्छा होगा .
 
डॉक्टर अजय कुमार चतुर्वेदी

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