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रोहिंग्या मुस्लिम एवं प्रवास

 आज भारत में रोहिंग्या मुस्लिमों  के आ जाने से एक समस्या सी बनी हुई है.  ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि कम से काम डेढ़ लाख रोहिंग्या मुस्लिम भारत में अवैध तरीके  से रह रहे है . जिनका आशियाना प. बंगाल , उत्तरप्रदेश  दिल्ली एवं दिल्ली के आस पास के इलाके, हरियाणा एवं पंजाब है .रोहिंग्या मुस्लिम म्यांमार में एक अल्पसंख्यक समुदाय से आते है . म्यांमार में जातीय संघर्ष की वजह इन लोगों का घर जलाया गया तथा उनको बहुसंख्यक बौद्धिस्ट ने  मार -मार कर  भगाया , जिनकी वजह से ये थाईलैंड , मलेशिया , बांग्लादेश एवं भारत जैसे देशों में शरण ले रहे है .
                           अवैध रोहिंग्या मुस्लिमों की बढती संख्या भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए खतरा है . क्योंकि  म्यांमार में उनको  प्रताड़ित करके भगाया गया है तथा इन पर जुल्म किये गए है . जिससे इन्होने भाग कर भारत जैसे देश में शरण ले रखी है , जो आतंकवादी संगठन है वे उसका फयदा उठाते हुए इनको अपने संगठन में शामिल करके और भी आतंकवादी घटनाओं को  अंजाम दे सकते है .क्योंकि इनके पास खाने एवं पीने को कुछ नहीं है . जिससे आतंकवादी संगठन इनको पैसे एवं धर्म का लालच देकर आसानी से आतंकी गतिविधियों में शामिल कर सकते है, इससे ये भारत में ही नहीं, आने वाले दिनों में विश्व समुदाय के लिए भी खतरा बन सकते है . वैसे भी इस मुद्द को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने म्यांमार की यात्रा भी की तथा वहाँ की सरकार से इस मुद्दे पर बात भी की  .
                              म्यांमार सरकार भी इस मुद्दे पर कोई ठोस निर्णय नहीं ले रही है . वहा की बहुसंख्यक जनसंख्या के बारे में ध्यान नहीं  दे रही है . जिससे रोहिंग्या मुस्लिम की समस्या और भी विकारल हो रही है . वैसे भी बहुत सारे रोहिंग्या मुस्लिम भारत एवं बांग्लादेश के बॉर्डर पर फंसे  पड़े है . वे भारत में घुसने के चक्कर में है . आखिर क्यो बांग्लादेश अपने यहाँ इनको नहीं बसा रहा है ? यदि बांग्लादेश अपने यहाँ बसाता है तो बांग्लादेश के लिए भी यह एक समस्या बन जायेंगे  . इसलिए बांग्लादेश के माध्यम से इनको भारत में घुसाया जा रहा है . आज भी भारत में बहुत सारे बांग्लादेशी रह रहे है , क्योकि बांग्लादेश में आधारभूत सुविधाओं का  आभाव है इस कारण से  बहुत सारे बांग्लादेशी भारत में अवैध तरीके से रह रहे है साथ ही रोहिंग्या मुस्लिम भी रह रहे है.
                               वैसे तो प्रवासी लोग रोजगार एवं सुरक्षा के लिए ऐसा करते है,लेकिन यदि  हम  बात प्रवास की करें  तो  पूरे विश्व में प्रवास सीरिया ,लीबिया या मिस्र से हो रहा  है . बहुत सारे सीरियाई यूरोप के लिए एक समस्या बन गए है . यू.एन. को सोचना चाहिए  कि भूखमरी , अशिक्षा , रोजगार सुरक्षा आदि ऐसे मुद्दे हैं जिन  पर खुलकर बोलने की जरुरत है जिससे प्रवास जैसी समस्या को झेल रहे लोगों की समस्या को कम किया जा सके .क्योंकि हर देश की अपनी आर्थिक , सामाजिक , एवं सांस्कृतिक  विरासत अलग होती है . नई  संस्कृति एवं नये परिवेश में लोगों को सामंजस्य  बैठाना काफी कठिनाई का काम होता है . इसको देखते हुए यही लगता है कि विश्व समुदाय को सोचना चाहिए कि रोहिंग्या मुस्लिमों  के  पलायन को रोकने की जरुरत है , जिससे लोगों की होने वाली परेशानियों को कम किया जा सकता है .
                            हर  देश अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाना चाहता है लेकिन उसको यह समझने की जरुरत नहीं है कि मानवता सबसे बड़ा धर्म एवं विरासत होती है , यदि - हम मानवीय मूल्यों एवं समस्याओ को नही समझ सकते तो हमारे लिए सबसे बड़ी परेशानी होती है . जितने भी प्रवासी है इनकी मूलभूत समस्या को समझने की जरुरत है तथा उनकी इस समस्या का निदान करना चाहिये . जैसे म्यांमार में  प्रधानमंत्री का दौरा, रोहिंग्या मुस्लिम को वापस भेजना तथा उनको फिर से म्यांमार में बसाया जाना  , जिससे भवष्यि में आने वाली समस्या को कम किया जा सके .
 
     
डॉ. अजय कुमार चतुर्वेदी         

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