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हिंदी दिवस

भारत की राजकीय भाषा हिंदी है तथा हमारी मातृभाषा भी है. आज भी भारत में लगभग 42 % लोग हिंदी बोलते हैं. यदि विश्व के बारे में बात करें तो पहले नंबर पर चीनी,दूसरे नंबर पर अंग्रेजी,तीसरे नंबर पर स्पेनिश तथा चौथे नंबर पर हिंदी बोली जाती है. भारत के अलावा फिजी ,नेपाल ,एवं पाकिस्तान में हिंदी बोली जाती है यदि हम अपने देश की बात करें तो पातें है कि 18 .11 % लोग बंगाली बोलते हैं, 7 .19 % तेलगु, 6 .99 % मराठी, 5 .91 % तमिल एवं 5 .01 % लोग उर्दू बोलते है. इसको देखते हुए तो यही लगता है कि हमारे देश में हिंदी सबसे अधिक बोली जाती है लेकिन आने वाले समय में हिंदी उपेक्षा का शिकार हो जाएगी, क्योंकि आजकल लोग दिखावे की प्रवृति की वजह से अपने बच्चों की शिक्षा अंग्रेजी में ही चाहते हैं. वैसे लोगों को अपनी मातृ भाषा को मजबूत करना चाहिए जिससे लोगो  का विकास सम्भव हो सके .आज हमारे देश में हमारी हिंदी उपेक्षित है, क्योंकि लोगों का ध्यान अंग्रेजी पर अधिक है. यदि हिंदी की इसी तरह से उपेक्षा होती रहेगी तो आने वाले समय में हमे इसका बहुत ही खामियाजा भुगतना पड़ेगा,क्योंकि अपनी भाषा की उपेक्षा करके हम अपना विकास नहीं कर सकते है.
                                    यदि पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था में विकसित अर्थव्यवस्था को देखे तो पाते हैं कि वे अपनी राष्ट्र भाषा को विकसित करते है तभी वो विकसित हो पाएं है .जैसे -जापान,इंग्लैंड ,अमेरिका, जर्मनी, चीन आदि विकसित देश अपनी ही मातृ भाषा को मजबूत करते हैं .जैसे कि जापान ,जापानी को ,फ़्रांस ,फ़्रांसिसी को, जर्मनी ,जर्मनी को ,अमेरिका व इंग्लैंड में अंग्रेजी को बढ़ावा दिया जाता है.लेकिन हमारे देश में पता नहीं क्यों हिंदी को छोड़ कर अंग्रेजी पर जोर दिया जा रहा है.अपनी मातृ भाषा में हम लोग अच्छी तरह से समझ सकते हैं और विचार कर सकते है. तथा अपने दुःख दर्द एवं पीड़ा को बाँट सकते है.लेकिन विदेशी भाषा में हम लोग कामयाब भी हो सकते है. जितना अच्छा बच्चा अपनी मातृ भाषा में समझ सकता है वह किसी दूसरी भाषा में नहीं समझ सकते है.और जब तक बच्चा समझ नहीं सकता तब तक वह कुछ भी नहीं कर सकता है. क्योंकि सबसे पहले उसकी जरूरत है समझ को विकसित करना,और यह सब सम्भव हो सकता है उसकी भाषा से .आज चीन का उत्पादन एवं तकनीक काफी अच्छा है क्योंकि उनके बच्चों को उनकी भाषा की अच्छी समझ है. मैं जब अफ्रीका में पढ़ाता था तो मुझे पता चला कि हमसे पहले यूरोपियन शिक्षक वहां पर पढ़ाता था लेकिन मैं यहां यह कहना चाहूंगा कि यूरोपियन शिक्षक की अंग्रेजी इतनी अच्छी थी जिससे वे छात्रों को समझाने में उन्हें मुश्किल होती थी.तब वे भारतीयों को वहां ले जाने लगे क्योंकि भारतीयों की अंग्रेजी उतनी अच्छी नहीं होती क्योंकि ये हमारे मातृ भाषा नहीं है. जिससे कि बच्चे उसे आसानी से समझ लेते थे और उनका विकास आसानी से हो जाता था. 
                                           हिंदी के विकास से ही देश का विकास हो सकता है तथा लोगो को यह समझना चाहिए कि किसी भी मातृ भाषा में हमारी अभिव्यक्ति तथा अपने दुःख दर्द सही तरीके से कर सकते हैं. जिससे लोगों का बौद्धिक, मानसिक एवं आर्थिक विकास सम्भव हो सके. आधुनिकता की दौड़ में हमारी निर्भरता विदेशी भाषाओँ पर बढ़ती जा रही है. उससे सांस्कृतिक विरासत का बिखराव होगा तथा हम अपने नैतिक मूल्यों को नष्ट कर देंगे. हमें हिंदी को बढ़ावा देना चाहिए जिससे कि लोगों के अंदर हिंदी के प्रति संदेह एवं उपेक्षा की भावना को कम किया जा सके .हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा एवं मातृ भाषा है. हमे अपने देश में ही हिंदी को बढ़ाने के लिए हिंदी दिवस को बढ़ावा देना पड़ रहा है.हम अपनी हिंदी से ही अपने कल को अच्छा बना सकते हैं .और बच्चों की सोच एवं क्षमता को बढ़ा सकते हैं .
 
डॉ. अजय कुमार चतुर्वेदी 

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