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फर्जी वादे एवं फर्जी इरादे

एक आंकड़े के अनुसार 40 केंद्रीय विश्वविद्यालय में लगभग 6 हजार पद खाली पड़े हैं. यह हाल केवल केंद्रीय विश्वविद्यालयों का है, यदि हम बात करें निजी एवं राज्य विश्व विद्यालयों की तो उनका सारा काम राम भरोसे ही है . इसको देखते हुए यही लगता है कि हमारी राजनीतिक पार्टियां सिर्फ अच्छे वादे एवं सपना दिखाने के सिवा जनता के लिए कुछ नया नहीं करती हैं.उनकी सिर्फ एक ही इच्छा होती है कि किस तरह से पैसे बचाकर उसको कालेधन के तहत अपने खाते में डाला जाये या अपनी सम्पत्ति बनाया जाये .आखिर ऐसा क्या है कि जो नेता चुनाव के समय पर रोजगार व स्वास्थ्य की बात और वादें करतें है तथा चुनाव के बाद सत्ता में आते ही शिक्षा ,स्वास्थ्य एवं रोजगार जैसे मुद्दे को भूल जाते हैं. इसका क्या मतलब है? बातें तो नेकी की करतें हैं लेकिन काम नेक नहीं होते हैं.
                                                आज भी भारत में बेरोजगारी ,शिक्षा एवं स्वास्थ्य की स्थिति काफी दयनीय है. लेकिन इस पर सोचने के सिवा राजनीतिक पार्टियां एवं नेता व्यापार करने लगतें हैं. इसका तो सीधा मतलब यही है कि जब सत्ता मिल जाये तो लूट -खसौट करते रहो. एक रिपोर्ट के अनुसार जो भी नेता जब सत्ता में होता है तो उसकी आय में  5 से 10 गुना इजाफा हो जाता है. लेकिन जो भी कम्पनिया है जैसे रिलायंस आदि उनकी सालाना आय 10 % के लाभ दर से ही होती है.इसका मतलब तो यह है कि राजनीति करके झूठे वादे करो और पैसा बनाओ. क्योंकि यदि इंसान व्यापार करेगा तो इस तरह से जल्दी से उसे वो लाभ नहीं मिल पायेगा जो उसे मिलना चाहिए.तथा राजनीति करेगा तो उसे लाभ सौ प्रतिशत होना तय है .जितने भी नेता हैं आखिर उनके पास अरबों की सम्पत्ति आती कहाँ से है. इसका तो यही मतलब है कि लोगों को नौकरियों से महरूम कर दो और नौकरी न देने से जो पैसा बचता है उसको कालेधन के रूप में बदलकर अपनी आय बढ़ाओ .
                                                  हमारे देश के नेताओं को मालूम है कि यदि लोगो के रोजगार ,स्वास्थ्य एवं शिक्षा संबंधित सभी समस्याओं को दूर कर दिया तो लोग उनको पूछेंगे ही नहीं. इसको देखते हुए जनता को सोचने की जरूरत है कि उनको छलने वाला अपनी ही जरूरत का ध्यान रखता है न कि जनता की जरूरत का ध्यान रखता है .हाल ही में लालू की दिल्ली एवं पटना की सम्पत्ति जब्त कर ली गयी जो कि करीब 180 करोड़ की थी तथा आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में लालू पर केस भी चल रहा है.ये बात और है कि यदि लालू सत्ता पक्ष में होते तो ऐसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता. लेकिन यह बड़े दुःख की बात है कि जितने भी नेता हैं वे अपनी सम्पत्ति बनाने पर ज्यादा ध्यान देतें हैं. यदि लोगों को सरकारी नौकरी मिल जाएगी तो लोगों के बैंक अकाउंट में पैसा आ जायेगा, लेकिन लोगों को बेरोजगार रखकर उसी पैसे को फर्जी बिलिंग या फर्जी प्रोजेक्ट के माध्यम से अरबों -खरबों की कमाई करतें है . अतः राजनीति वह व्यापार है जिसमे सौ प्रतिशत लाभ होता ही है .
                                             जनता को जागरूक होने की आवश्यकता है जिससे कि ऐसे फर्जी नेताओं से बचा जा सके. जो कि काम के लिए राजनीति नहीं करते है बल्कि अपने व्यापार के लिए करते है. आज भी देश की राजनीति पैसा कमाने का जरिया बनी हुई है जिसमे बड़े -बड़े नेता अपना भाग्य आजमा रहें हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार राजनीतिक पार्टियां 80 % चन्दे का कोई लेखा -जोखा नहीं रखतीं है तथा 20 %  दर्शातीं हैं. यदि राजनीतिक पार्टियों से आरटीआई के तहत पूछा जाये तो उनका कहना है कि हमारी पार्टी पर आरटीआई का नियम लागू नहीं होता है. जो भी राजनीतिक पार्टी सत्ता में होती है उसकी पार्टी का फंड दिनों -दिन करोड़ों रूपये बढ़ जाता है और जब सत्ता से हटती है तो उसकी पार्टी का फंड उस प्रकार से नहीं बढ़ता जिस प्रकार से सत्ता में रहते हुए बढ़ता है .इसीलिए ऐसे फर्जी वादे करने वाले नेताओं से सजग रहने की जरूरत है .
 
 
 
 
 
 
डॉ. अजय कुमार चतुर्वेदी    

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