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'मणिकर्णिका: में द क़्वीन ऑफ़ झांसी'

बनारस में कभी गंगा के घाट पर पली बढ़ी रानी लक्ष्मीबाई गुरुवार की शाम एक बार गंगा की गोद में थी.पर ये लक्ष्मीबाई वीरांगना लक्ष्मीबाई के जीवन चरित्र पर बन रही फिल्म 'मणिकर्णिका: द क़्वीन ऑफ़ झांसी' का किरदार निभा रही कंगना रनौत थी. जो दशश्वमेघ घाट पर शाम की आरती के वक़्त रानी लक्ष्मीबाई की पोशाक में गंगा के किनारे आईं. वहां उन्होंने पहले गंगा स्तुति की, फिर गंगा पूजन किया, जल और दूध से मां गंगा का अभिषेक किया और आरती करने के बाद उतर पड़ी गंगा में डुबकी लगाने के लिये. उन्होंने पांच डुबकी लगाई और हर हर गंगे कहते हुए बाहर निकली. उनके इस कदम से पूरा घाट हर हर गंगे और हर हर महादेव के नारे से गूंज उठा. स्नान के बाद वो गंगा आरती में शामिल हुई. इसके पहले दशाश्‍वमेघ घाट के बगल के राजेन्द्र प्रसाद घाट पर फ़िल्म के राइटर, डायरेक्टर, स्क्रीन प्ले राइटर, संगीतज्ञ और फ़िल्म के प्रोड्यूसर ने बारी-बारी लोगों से रूबरू हो कर बताया कि ये फ़िल्म रानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर आधारित है. इस फ़िल्म के राइटर बॉलीवुड के जाने माने लेखक के वी विजयेंद्र हैं जिन्होंने 'बाहुबली', 'बाहुबली द कनक्लूजन' और 'बजरंगी भाईजान' जैसी सफल फिल्में लिखी हैं. फ़िल्म के गीत और संवाद प्रसून जोशी ने लिखे हैं.नारी शक्ति की भी प्रेरणा है 'मणिकर्णिका: द क़्वीन ऑफ़ झांसी' फ़िल्म. फ़िल्म का संगीत देने वाले शंकर-एहसान-लॉय ने कहा कि अक्सर फिल्में पांच सितारा होटल में अनाउंस की जाती हैं लेकिन ये शायद पहली बार है जब कोई फिल्म गंगा किनारे खड़े होकर अनाउंस की जा रही है. ये अपने आप मे एकदम अलग है. राजेंद्र प्रसाद घाट पर फ़िल्म का एक 20 फिट का पोस्टर भी रिलीज किया गया. गौरतलब है कि 1857 की नायक रहीं वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 1828 में बनारस में एक मराठी ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उनका बचपन तुलसी घाट के बगल अस्सी और रीवा घाट पर बीता. यहीं घाट की सीढ़ियों पर उन्होंने घुड़सवारी और तलवारबाजी भी सीखी. बाद में जीवन में कई उतार चढ़ाव आये. बच्चे को खोया, फिर पति को खोया, फिर राजपाट खोया. लेकिन नहीं खोया तो आत्मबल. फ़िल्म में उनके जीवन की घटनाओं को छूने की कोशिश होगी.


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