Loading

Enquiry
articale
digital advertising
Contact Form

घरेलू उपचार और बेकार हो चुकी दवाओं के प्रयोग से घायल हो रही हैं आंखें

अध्ययनकर्ताओं के अनुसार, ग्रामीणों में आंखों में पानी आना, आंखें लाल होना, खुजलाहट, दर्द, जलन और कम दिखने जैसी शिकायतें ज्यादा पाई जाती हैं। चिकित्सकों के अनुसार,आंख की पुतली की रक्षा करने वाले आंख के सफेद भाग (कार्निया) में संक्रमण को मोतियाबिंद के बाद अंधेपन का प्रमुख कारण माना जाता है। इससे अनजान अधिकतर ग्रामीण आज भी घरेलू उपचार के साथ ही एक्सपायर्ड दवाओं, बिना लेबल वाली स्टेरॉइड आई ड्राप्स का प्रयोग करते हैं।
घरेलू उपचार में उपयोग की जाने वाली दवाएं पौधों के सूखे भागों, दूध, लार और मूत्र आदि से तैयार की जाती हैं। सर्वे में पाया गया कि 25 फीसद से ज्यादा ग्रामीण आंखों में सुरमा, काजल, शहद, घी, गुलाब जल जैसे उत्पादों का उपयोग करते हैं। आंखों के उपचार के लिए प्रयोग की जाने वाली दवाओं में 26 फीसद स्टेरॉइड, 21 फीसद एक्सपायर्ड एवं बिना लेबल की दवाएं और 13.2 फीसद घरेलू दवाएं शामिल हैं।

और अधिक स्वस्थ्य के लिए