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समय सबसे अधिक बलवान

समय सबसे अधिक बलवान होता है .समय से बलवान कुछ है ही नही . समय कभी किसी के लिए नही रुकता .ये निरन्तर अपने अनुरूप गति करता रहता है .अक्सर लोगो द्वारा सुना होगा कि, समय का पहिया कभी आगे चलता है तो कभी पीछे चलता है .लेकिन लोगो की ये धारण बिल्कुल गलत है.क्योकि समय सदैव सीधी रेखा में चलता है .और सीधी रेखा को वापस उसी जगह पर नही लाया जा सकता है .तभी तो गया समय गया ही हो जाता है और मनुष्य सिर्फ सोचता ही रह जाता है .इसे एक उदाहरण रूप में समझने की कोशिश करते है - सबसे पहले बचपन आता है फिर किशोरावस्था उसके बाद जवानी और अंत बुढ़ापे पर ही होता है.कभी सुना है 25 साल की उम्र के बाद उम्र 24साल की हो गयी हो .प्रकृति कभी किसी के साथ भेदभाव नही करती .ये सभी के साथ सामान्य व्यवहार ही रखती है.पर मनुष्य फिर भी दोष प्रकति को ही देता है .मनुष्य को काम समयानुरूप ही करना चाहिए वरना समय बीतता चला जाता है और फिर सिर्फ पछतावा ही रह जाता है.इसीलिए हर मनुष्य को अपने कार्य को समय रहते ही कर लेने चाहिए .जो मनुष्य समयानुरूप अपने काम को करते है उनका सफल होना लगभग तय रहता है .और जो आलस दिखाते है या कार्य को बाद पर टाल जाते है या  थोड़े समय के बाद करेगे वो फिर कुछ कर ही नही पाते.पर अपनी किस्मत को दोष देना कभी नही भूलते.लोग सफल मनुष्य की मेहनत को उसकी अच्छी किस्मत बताते है पर उस सफल मनुष्य के पीछे की मेहनत को भूल जाते है समय ही रफ्तार बहुत तेज होती है.इसे कोई भी जान नही सकता.पर  इसके अनुरूप अवश्य चला जा सकता है .और समयानुरूप चलना ही मंजिल तक पहुँचा देता है. इसके अलावा सफलता का कोई भी अन्य विकल्प नही है . सफलता भी उन्ही को चुनती है जो समय के अनुरूप प्रयास करते है .
इस लेख को इन चार पँक्तियो द्वारा पूर्ण विराम दे रहे है 
         " वक्त की रफ्तार बहुत तेज होती है
           सूर्य निकलते ही सुबह से शाम होती है
           हर क्षण भागता है इस गति से 
          जैसे शरीर ह्रदय की गति होती है    
           वक्त की रफ्तार को ना जान सका है कोई 
           ना जान सकेगा कोई ,आंधी से भी तेज होती है वक्त की रफ्तार 
            तभी तो पता नही चलता ,मनुष्य कब हो जाता है
                 बचपन से बुढ़ापे का शिकार "