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अच्छी संगति जीवन को अच्छी दिशा देती है

अच्छी संगति जीवन को अच्छी दिशा देती है . जीवन को कामयाबी तक पहुचती है . सिर्फ इतना ही नही, बुरे व्यवहार वाले मनुष्यो को भी अच्छा बनाती है . वही दूसरी ओर खराब संगति अच्छे मनुष्य में भी गलत भावना का प्रसार करती है .क्योकि अच्छे और बुरे दोनों ही व्यवहारो का असर मनुष्यो पर पड़ता है .चलिए इसे एक कहानी के माध्यम से समझने का प्रयास करते है -
 एक ब्राह्मण था .जिसे उसकी पत्नी प्रतिदिन व्यंग्य - बाणों से उसे दुखी किया करती थी . अपनी पत्नी के इस तरह के बर्ताव से तंग आकर उसने घर ही छोड़ दिया .अब ब्राह्मण एक घने जंगल में पहुच गया और रास्ता भूल जाता है . ब्राह्मण चलता चलता एक शेर की गुफा में पहुचता है .शेर का एक महामंत्री होता है . शेर ने अपना महामंत्री एक हंस को बनाया हुआ है .हंस और शेर दोनों गुफा में बैठे हुए थे . ब्राह्मण ने शेर को देखा तो डर से थर -थर कापने लगा. हंस ,ब्राह्मण को देखते ही समझ गया की ये रास्ता भटक कर शेर की गुफा में आ गया है . और अब शेर को देखकर डर रहा है . हंस अच्छे स्वभाव वाला था . उसने अपने अच्छे स्वभाव से शेर को भी अच्छा बना दिया था . हंस ने समझदारी का परिचय देते हुए कहा की अंदर आइये देव्,आपका इस गुफा में स्वागत है .ये सुनकर ब्राह्मण का ढांढस बढ़ा. ब्राह्मण ने शेर को दोनों हाथो से आशर्वाद देते हुए कहा कि," यजमान दीर्धायु हो ".अब शेर हंस से पूछता है ये कौन है? हंस उत्तर देते हुए कहता है -ये ब्राह्मण आपका कुल गुरु है . और थोड़ी देर पहले इन्होंने आपको सुखी और दीर्धायु का आशीर्वाद दिया है .शेर ये सुनकर बहुत खुश होता है और ब्राह्मण को अपने गले में पडा एक सोने का चक्र भेट स्वरूप देता है . ब्राह्मण उसे लेकर अपनी पत्नी के पास पहुचता है . उस चक्र को पाकर ब्राह्मण की पत्नी बहुत खुश होती है . थोड़े समय के बाद ब्राह्मण के मन में फिर लालच आता है .और फिर से शेर के पास पहुँच जाता है  . पर इस बार शेर का महामंत्री कौआ बन जाता है .क्योकि हंस थोड़े समय के लिए मानसरोवर की यात्रा पर गया हुआ है . इसी से पता चलता है  कि,व्यवहार जिसका जैसा है वो वैसा ही रहता है और उसी प्रकार का असर औरो पर भी डालता है . ब्राह्मण फिर से शेर को आशीर्वाद देता है .पर इस बार  कौआ शेर की तरफ देखते हुए कहता है  " कैसी बात कर रहे है शेर का भी कभी कुलगुरु होता होगा ,ये ब्राह्मण तो आपका भोजन है तुरन्त खा लीजिये इसे". पर शेर में अभी भी हंस की दी गयी सीख बाकी है .इसलिए उसने ब्राह्मण को खाया तो नही पर ये कहते हुए वापस लौटा दिया -
         "हंस तो सरोवर गया ,काग भया परधान
         जा विप्र घर आपने,शेर किसका यमराज "