Loading

Enquiry
articale
digital advertising
Contact Form

चुनौती ही चमक है

चुनौती  स्वीकारना बहुत जरूरी है . क्योकि ,इसी से जुडी मनुष्य की सुखद सफलता की सीढ़ी है.आगे बढ़ने के लिए हर मनुष्य को एक दिन मे 86,400 सेकंड ही मिलती है. अब वो उसी पर निर्भर है कि, वो इनका सदुपयोग कैसे करता है. अमेरिकी आंकड़े के अनुसार,42 % लोग अपने लक्ष्य को पूर्ण कर लेते है.जिनमे से100 - 42 =58 %वो लोग है जो अपने लक्ष्य को पूर्ण नही करते है . इसके पीछे एक कारण उनका लक्ष्य के प्रति गम्भीर ना होना है .और दूसरा ,लोगो द्वारा मिली चुनौतीयो को स्वीकार ना करके बेचारे भाव को अधिक आगे लाना भी हो सकता है . आप कभी गौर करना, जो लोग कहते है-"मेरे पास संसाधनों की कमी है ,मेरे पास पैसो की कमी है ,मेरे पास डिग्री नही है,वरना मैं भी आज इसके जैसा होता,उसके जैसा होता...पर क्या करू है ही नही" वो लोग चुनौतीया लेना नही चाहते है ,सिर्फ बेचारा भाव मुख पर ला के लोगो की सांत्वना बंटोरते है. और फिर पूरे जीवन सांत्वना ही बंटोरते रह जाते है. चुनौतीयो का होना बहुत जरूरी है बिना चुनौती , मनुष्य कुछ बन ही नही सकता . अगर कोई हमे चुनौती देता है तो हम उस चुनौतीपूर्ण काम को दुगनी मेहनत और लगन के साथ करते है. और समयानुरूप ही करते है .यदि मनुष्य को चुनौती ना मिले तो वो आगे बढ़ नही सकता ,अपनी बनाई मंजिल तक पहुँच ही नही सकता. चुनौतीया मनुष्य को मजबूत बनाती है .ऊँची बुलन्दियो से मुलाकात कराती है . केवल चुनौतीया ही मनुष्य को बनाती है . अक्षर च से ही चुनौती शब्द बनता है और अक्षर च से ही चमक शब्द बनता है. इसीलिए चुनौतीयो को स्वीकारते चलो और हर पथ चमकते रहो.