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असीमित वार्ता परेशानी का सबब

मनुष्य भी अजीब है ना उसे हँसने का पता होता है और ना रोने का . वो तो बस खुद को साबित करने की जद्दो -जहद में लगा होता है . रात ,दिन खुद को बुलन्दी तक पहुँचाने के चक्कर में बेचैन रहता है . कुछ मनुष्य ऐसे भी होते है जो अधिक बोलकर सम्पूर्ण समूह को प्रभावित करते की कोशिश करते है. और अधिक बोलना अपनी अक्लमन्दी समझते है. हर कार्य यदि तय सीमा में ही किया जाये तो अधिक उचित रहता है. बोलना उचित है. बिना बोले समस्या को या मनुष्य के भीतर छुपी उसकी  अच्छी भावना को वक्त नही किया जा सकता. परन्तु असीमित वार्ता कई बार परेशानी का सबब बन जाती है . क्योकि , शब्द नियंत्रण ना होने से मनुष्य उन शब्दो को भी बोल देता है जो उसे नही कहने चाहिए. अन्य मनुष्य उसके सम्मुख तो कुछ कहने से बचते है परन्तु उसकी अनुपस्थिति में उसकी चर्चा अवश्य करते है .मुर्ख अधिक बोलना अपनी शान समझते है . अकड़ दिखाना, दूसरो को नीचा दिखने में अपना बहुत   नाम समझते है. एक बात हमेशा ध्यान रखे-  दूसरो पर अधिक कटाक्ष करने से कई गुना अच्छा है खुद से कुछ करके दिखाना.कटाक्षी मनुष्य को अपनी अच्छाई से दबाओ.कटाक्षी मनुष्य को अपने अच्छे कामो से दबाओ .कटाक्षी मनुष्य को अपने अच्छे प्रभाव से दबाओ .कटाक्षी मनुष्य को अपनी अच्छाई से दबाओ. आइये , आपको एक कहानी पढ़वाती हूं ...किसी जंगल में एक तोता ,और एक मैना रहते थे.मैना अमरुद के पेड़ पर रहती थी और तोता लीची के पेड़ पर रहता था. मैना अच्छे विचारो वाली थी .मैना हमेशा ख़ुश रहती और अपने मुख से अच्छे शब्दो का उच्चारण किया करती थी . जिस पेड़ पर मैना रहती थी वो बहुत हरा भरा रहता था . खूब फल लगते थे . वही दूसरी ओर तोता  ईर्ष्यालु ,झगड़ालू स्वभाव वाला था . उसके पेड़ पर लीची नही आती थी. और हरा -भरा पेड़ भी सूख जाता  था. उसे भोजन के लिए भी मैना के  अमरुद पर आश्रित रहना पड़ता था .तोता, मैना से ईर्ष्या करता था और हर रोज झगड़ता था. और मैना से कहता था...मेरे पेड़ को पर्याप्त पानी नही मिलता है . जिस कारण ये सूख गया है . और तेरे पेड़ को हर रोज पर्याप्त पानी मिलता है तभी तो तेरा पेड़ इतना हरा भरा है. मैना ने सोचा इसे अपना पेड़ रहने के लिए दे देती हूं  और मैं इसके पेड़ को अपना घर बना लेती हूं वरना ये (तोता) हर -रोज मुझे इसी तरह सुनाता रहेगा .अब हुआ ये कि, लीची का सूखा हुआ पेड़ जो अब मैना ने ले लिया था ,वो फिर से हरा भरा हो गया . और अमरुद का हरा -भरा पेड़ अब पूरी तरह सूख गया.तोते को बड़ा आश्चर्य हुआ कि , जो पेड़ पूरी तरह से सूख चुका था. वो फिर से हरा -भरा हो गया . और जो पेड़ पहले से हरा - भरा था . वो आखिर सूख कैसे गया . तोते ने सोचा , जरूर मैना कोई टोना - टोटका जानती है .तभी तो मेरा पेड़ सूख जाता है और इसका पेड़  फल -फूल जाता है. तोते के व्यवहार में ही ईर्ष्यालु व झगड़ालूपन शामिल था .और ना ही तोते का उसके शब्दो पर नियंत्रण था .इसी वजह से तोता फिर मैना से झगड़ा करता है. मैना शांत और स्वभाव में मिलनसार थी . अतः मैना शुद्ध भावना से तोते को समझती है कि , बुरा   व्यवहार , ईर्ष्यालुपन, झगड़ालूपन ही तूम्हारे पेड़ के सूखने का कारण है . इस बर्ताव को तुरन्त छोडो .फिर अपने पेड़ की स्थिति को देखना .इस बार तोते को मैना की बात समझ आ गयी . तोते के बुरे बर्ताव छोड़ते ही उसका पेड़ भी फल- फूल गया. क्योकि अब तोते ने अच्छे व्यवहार को जो अपना लिया था. इसीलिए जब बोलो अच्छा बोलो और शब्द सीमा मे रह कर बोलो .  आप सभी पाठको से उम्मीद है कि, इस कहानी का सार समझ आया होगा