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अक्षर 'स' समस्या से समाधान तक

अक्षर 'स 'से तो सभी परिचित है. ये अक्षर छोटा सा जरूर है .परन्तु इसका मोल उतना ही अधिक है. अक्षर 'स' से समस्या शब्द बनता है .और अक्षर 'स' से ही समाधान शब्द भी बनता है. अगर समस्या है, तो समाधान भी निश्चित है . अक्सर देखा गया है कि, अधिकतर मनुष्य बहुत जल्दी परेशान हो जाते है .समस्या का नाम सुनते ही हड़बडा जाते है. तुरन्त दवाइयों की मदद लेते है.यानी, आज के दौर में मनुष्य दवाइयों पर इस कदर आश्रित हो चुका है कि,उसी को अपनी परेशानी का हल समझने लगा है. वैज्ञानिको के अनुसार ,यदि मनुष्य चिंता कम करे, अच्छे  और सकारात्मक विचारों के साथ जीये . खुशनुमा माहौल बनाके रखे तो उसे पूरे जीवन  काल  में कभी दवा की आवश्यकता पड़ेगी ही नही .क्योकि, मनुष्य के शरीर में उपस्थित  (खुशनुमा माहौल के कारण) हार्मोन से स्त्रावित होने वाला जूस अच्छा स्त्रावित होगा. और शरीर से स्त्रावित अच्छा जूस पूरे शरीर को ठीक रखता है. कभी गौर करना - जब कभी बहुत ज्यादा बिना किसी विशेष कारण मानसिक रूप से चिंतित होता है तो उसे गैस बन जाता है. चाहे आपने कुछ भी एसिड बनाने वाले पदार्थो का सेवन ना भी किया हो . क्योकि ज्यादा परेशानी से मनुष्य हार्मोन उसी अनुरूप शरीर से जूस निकालना शुरू कर देती है.इसीलिए,किसी समस्या की अधिक चिन्ता करना बेमतलब है. जरा सोचिये ,जब 'स' से ही समस्या बनी है तो सम्भवतः समाधान भी उसी से बनेगा. हर एक चीज़ के दो पहलू होते है .क्योकि समाधान है इसीलिए समस्या है .प्रकृति हर चीज़ को बराबर ही तोलती है. तो फिर ऐसा कैसे हो सकता है...प्रकृति की तराजू में समस्या का पलड़ा हो ,समाधान का नही.समस्या के साथ ही उसका समाधान जुड़ा हुआ है बस जरूरत है, ठीक तरीके से हल निकलने की .