Loading

Enquiry
Enquiry
digital advertising
Contact Form

अनुशासन के बिना अभ्यास नामुमकिन है

मनुष्य का अनुशासित होना उसकी सफलता को सुनिश्चित करता है .अनुशासन का कोई अन्य विकल्प नही हो सकता. क्योकि, अनुशासन स्वयं में अति उत्तम विकल्प है.देखो प्रकृति को... प्रकृति अपने सभी काम अनुशासन में रहकर ही करती है .अगर प्रकृति अपने अनुशासन को थोड़े समय के लिए भूल जाए तो पूरी पृथ्वी अस्त-व्यस्त हो जाएगी .उदाहरण रूप में समझिये - सूर्य को सभी हर रोज देखते है . सूर्य अपने अनुशासन में रहकर प्रति दिन समय पर प्रकाश फैलाता है .चन्द्रमा समय से अपनी चांदनी  सम्पूर्ण आकाश मण्डल पर बिखेरता है ,मौसम अनुशासन में रहकर ही(सर्दी ,गर्मी ,बरसात) परिवर्तित होते है.कोई भाग्य कुंडली किसी मनुष्य का भाग्य नही बना सकती . मनुष्य भी अजीब है .वो अपनी असफलता का दोष भाग्य को देता है .जो बहुत आसान तरीका भी है.परन्तु असफलता का मुख्य कारण मनुष्य का अनुशासनहीन होना है .अनुशासन में रहकर मनुष्य अपने हर कार्य को समयानुरूप करता है. और यही उसकी सफलता का कारण बनता है . अनुशासन मनुष्य में शालीनता लाता है. अनुशासन ही मनुष्य को सफल बनाता है .जीवन में  सबसे मूल्यवान शब्द अनुशासन ही है . अनुशासन मनुष्य को सफलता की सीढ़ी तक पहुचाता है. समय पर पढ़ना है तो पढ़ना है, पांच घण्टे पढ़ना है तो पांच  घण्टे ही पढ़ना है, बारह से पांच बजे तक पढ़ना है तो बारह से पांच तक ही पढ़ना है . ये अनुशासन ही धीरे -धीरे आदत में परिवर्तित हो जाता है . मन ना भी हो ,तो भी आप उस कार्य को करेगे क्योकि, आप उस कार्य के आदी जो हो चुके है . अनुशासन थोड़े समय में ही आदत में परिवर्तित हो जाता है .यकीन मानिये यदि आप अपने कार्य के प्रति अनुशासित है तो कोई भाग्य कुंडली आपको आपकी मंजिल पाने से नही रोक सकती .