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सफलता और खुशी क्या है जरूरी

जीवन में सफलता को प्राप्त करना और जीवन में खुश रहना दोनों एक ही है या अलग यह कहना कुछ लोगों के बहुत मुश्किल है फिर भी ज्यादा का मानना है कि सफलता और खुशी एक ही सिक्के के दो पहलू है, क्योंकि जहां सफलता होती है वहां खुशी तो खुद ही आ जाती है और जहां खुशी होती है वहां सफलता पहले से ही होती है इसके विपरीत बहुत से लोग है जो सफलता और खुशी को एक नदी के दो किनारे मानते है और कहते है कि ये दोनों अलग बातें है कुछ लोगों का मानना है कि संसार में बहुत से लोग ऐसे भी है जो सफल तो है लेकिन उनकी जिंदगी में खुशी बहुत कम या फिर न के बराबर है और दुनिया में ऐसे लोग भी है जो सफल नही है और वो लोग खुश है और जिन्हें सफल नही कहा जा सकता अब मेरे लिए ये जानना मुश्किल हो रहा था कि ये दोनों सफलता और खुशी एक ही सिक्के के दो पहलू है या एक नदी के दो किनारे है, ये जानने के लिए मैं एक महिला से मिली जो एक टीचर थी और बहुत सफल भी थी उनसे बात करने पर मुझे पता चला की वह इंजीनियर बनना चलती थी लेकिन परिवार में अधिकतर टीचर थे तो अभिभावकों ने उन्हें भी टीचर ही बनने की सलाह दी उन्होंने बताया कि वह सफल तो है, लेकिन खुश नही है क्योंकि वह जो चाहती थी वो नही है उनकी इस बात को सुनकर मैं असमंजस में थी उसके पश्चात मैं एक अन्य व्यक्ति से मिली जो पुलिस विभाग में अधिकारी पद पर तैनात था उनसे बात करने पर मुझे पता चला कि वो भारतीय सेना में जाना चाहते थे लेकिन किसी कारण जा नही सके अब थोड़ी और उलझन हुई उसके बाद मैं एक अन्य व्यक्ति से मिली जो एक मामूली सी जॉब करता था और अपने जीवन से बहुत खुश था किन्तु वह सफल तो नही था कहने का अर्थ है कि सफलता और खुशी का साथ होना या न होना परिस्थिति पर निर्भर करता है अब ये परिस्थिति किसी के लिए एक सिक्के के दो पहलू हो सकती है और किसी के लिए एक नदी के दो किनारे हो सकती है वैसे वजह चाहे जो भी हो जीवन में खुश रहना सफलता से भी ज्यादा जरूरी है,