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विमुद्रीकरण के पश्चात महत्वपूर्ण प्रश्न : क्या प्रॉपर्टी खरीदने/बेचने का यह सही समय है?

पीएम नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर की रात विमुद्रीकरण की घोषणा के पश्चात रियल एस्टेट से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े डेवलपर्स और निवेशकों के बीच अटकलों और कयासों का बाजार गर्म है. जहां पिछले कुछ वर्षो से रियल एस्टेट का बाजार पहले ही गिरावट के ट्रेंडिंग ज़ोन में था, वहीं नोटबंदी के पश्चात इसे बहुत बड़ा झटका लगा है.
500 और 1000 रुपए के नोट बंद होने से पहले के ही दिनों की बात करें तो निवेशकों एवं खरीदारों को डेवलेपर्स के द्वारा आकर्षित करने के लिए तमाम सुविधाएँ जैसे कि डिस्काउंट्स, पार्किंग स्लॉट फ्री , सहूलियत भरे पेमेंट ऑप्शन्स दिए जा रहे थे लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि अब इन लुभावने प्रस्तावों से काम नहीं चलेगा और सम्पत्ति सैगमेंट में रफ्तार के लिए रियल एस्टेट डेवलेपर्स को कीमतों में कटौती करनी ही होगी

आपका फैसला इन कथनों  पर निर्भर करता है 
अब प्रश्न यह है कि यदि आप प्रोपर्टी खरीदने का मन बना रहे हैं तो आपको क्या करना चाहिए. विशेषज्ञों का मानना हैं कि कुछ समय इतंजार करे व फाइनेंस एडवाइस देने वाली फर्म एसेट मैनेजर्स के मैनेजिंग पार्टनर सूर्या भाटिया का कहना है कि प्रॉपर्टी के रेट अभी और गिरेंगे. न सिर्फ प्रोपर्टी का मूल्य कम होगा  बल्कि बैंकों द्वारा प्रोपर्टी खरीदने के लिए दिए जाने वाले लोन पर इन्ट्रेस्ट रेट भी कम हो सकता हैं. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से पेश की गई मौद्रिक नीति की समीक्षा के दौरान रेट कट का ऐलान किया जा सकता है, सूर्या भाटिया के मुताबिक यदि प्रोपर्टी खरीदने या फिर बेचने में कोई जल्दी नहीं है और प्रतीक्षा कर सकते हैं ज्यादा से ज्यादा एक साल तक भी इंतजार किया जा सकता है.
यदि किसी कारण जल्दी से जल्दी प्रोपर्टी बेचना चाहते हैं तो यह बिलकुल सही समय है कि प्रोपर्टी बेच लें क्योंकि आने वाले समय में प्रॉपर्टी की कीमतों में  और भी गिरावट आएगी, ऐसे में निवेशक को इन पर रिटर्न अभी के अनुसार कम मिलने की संभावना हो सकती है. सूर्या भाटिया के मुताबिक अभी सही से ज्ञात नही है कि आने वाले कुछ समय में रियल एस्टेट प्राइस में कितना प्रभाव पड़ सकता है लेकिन यह तय है कि प्रोपर्टी की कीमते कम होगी.

गिरावट का सबसे अधिक प्रभाव मुंबई और उसके पश्चात बेंगलुरु और गुड़गांव पर भी 
प्रोपइक्विटी के मुताबिक प्रोपर्टी की कीमतों में गिरावट का सबसे अधिक प्रभाव मुंबई और उसके पश्चात बेंगलुरु और गुड़गांव पर होगा. घर लेना आम लोगों की पहुंच से बाहर हो गया था. तथा उनके लिए विमुद्रीकरण के बाद अच्छा अवसर है. कुछ दिनों पहले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की सीएमडी अरुंधति भट्टाचार्य ने कहा कि यदि डिपॉजिट रेट कम होंगे तो कर्ज लेने वाले लोगों को भी इसका लाभ होगा और लैंडिंग रेट्स भी कम होंगे. ज्यादा प्रोपर्टी खरीदने के इच्छुक लोगों के लिए रेट्स में कटौती के पश्चात यह बहुत अच्छा समय होगा. लेकिन प्रोपर्टी के बाजार के जानकारों का मानना हैं कि कीमतों को लेकर कोई भी सही भविष्यवाणी करना, अभी बहुत जल्दबाजी होगी.
रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े लोगों का मानना है कि यह उथल पुथल अभी 6 महीने से लेकर 1 साल से ज्यादा नहीं होगी. वहीं खरीददारों को उम्मीद भी है कि प्रॉपर्टी की कीमतें कम होंगी. एक आकलन के मुताबिक, विमुद्रीकरण के पश्चात सौदे थमे हैं और 20 फीसदी दाम भी घटे हैं.
प्रोपइक्विटी का मानना है कि नोटबंदी के चलते आने वाले 6-12 महीने में 42 प्रमुख शहरों में में प्रोपर्टी की कीमत 30 प्रतिशत तक घट सकती हैं. फर्म का कहना है कि इससे 2008 के बाद डेवलपरों द्वारा बेची गईं और वे आवासीय संपत्ति जो सेल नहीं हुई  हैं, उनका बाजार मूल्य 8 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक कम हो जाएगा.
फर्म ने अपने बयान में कुछ दिनों पहले कहा था,‘भारतीय जमीन जायदाद क्षेत्र पर नोटबंदी के प्रभाव के कारण अवासीय संपत्तियों का बाजार मूल्य अगले 6-12 महीने में 8,02,874 करोड़ रुपये घट जाएगा.’