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इंसान की फुर्सत

जानते है फुर्सत शब्द मेँ कितना सुकून मिलता है . फुर्सत यानी खाली समय ,ऐसा समय जो सिर्फ और सिर्फ हमारा है. हमारे पास कोई काम नही होता करने के लिए ,कोई नही होता हमे परेशान करने के लिए ,कोई नही होता हमे डांटने - फटकारने के लिए .कोई विचार नही होता सोचने के लिए पर क्या आप जानते है ,मनुष्य मस्तिष्क कभी भी शांत नही रह सकता . चाहे कितनी भी कोशिश करे .कोई समस्या ना भी हो ,फिर भी मस्तिष्क कोई ना कोई विचार ले ही आता है .अगर आप सुकून से बैठे है तो आपसे आपका मस्तिक ये सवाल अवश्य करेगा कि, मैं सुकून से बैठा हूं, तो आखिर क्यों बैठा हूं ? और तो खाली नही बैठे.  लेकिन और खाली क्यों नही बैठे ? यानी , मैं बेवकूफ हूं . दूसरे मुझसे आगे निकल जाएगे .दूसरे मुझसे ज्यादा धन कमा जाएगे . इसका अर्थ ये हुआ कि ,मनुष्य का मस्तिक शांति मेँ भी शांत नही रह सकता. मनुष्य सुकून को जीते जी पा ही नही सकता ? खैर ये चर्चा का विषय नही है . चर्चा का विषय तो ये है - इंसान को जीवन मेँ फुर्सत मिलनी चाहिए या नही .... हर मनुष्य को ईश्वर ने बनाया है. सभी पर आवरण मिट्टी का चढ़ाया है .सभी की भावनाओ को भी समान ही बनाया है . यदि मनुष्य मस्तिष्क ना सोचे- विचारे .तो कोई भी कही पहुँच ही नही पाएगा . हर एक के जीवन पर पूर्ण विराम लग जाएगा .गौर करना, जो मनुष्य सही प्रकार से सोच - विचार नही पाता है . वो लोगो के द्वारा पागल शब्द से सम्बोधित किया जाता है . इसीलिए मनुष्य मस्तिष्क का सुचारू रूप से काम करना जरूरी है ... सिर्फ इतना ही नही ,हर मनुष्य का काम मेँ लगा रहना भी जरूरी है . यदि मनुष्य फुर्सत से रहेगा तो जीवन मेँ कुछ भी नही कर सकेगा .फिर ना कोई किसी से प्रतिस्पर्धा कर पाएगा . ना फिर कोई कही पहुँचने की इच्छा जताएगा. मनुष्य की जीवन बुलन्दी पर  पूर्ण विराम लग जाएगा .इसीलिये जितना रहो अच्छे कामो मेँ व्यस्त रहो ,खुद को ऊँची बुलन्दी तक पहुँचने मेँ व्यस्त रहो . और फुर्सत से सदैव दूर रहो .यही इस लेख का सार है .