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जीवन का दूसरा नाम है मेहनत

 मनुष्य की सफलता उसी के द्वारा सम्भव है अक्सर आप सभी ने सुना होगा वो बहुत छोटा इंसान था आज बहुत बड़ा बन गया है पता नही कैसे बन गया ?  शायद , हम लोग आगे बढ़ने के लिए आवश्यक प्रयास करते ही नही . आवश्यक प्रयास यानी ,उतनी मेहनत तो अवश्य ही की जाए, जितनी लक्ष्य प्राप्ति के लिए आवश्यक है साधारण सा दिखने वाला मनुष्य जब बुलन्दी को छूता है तो अन्य असफल मनुष्य ईर्ष्या में भरकर कुछ भी गलत  शब्द उस सफल मनुष्य के लिए बोलते है पर ये भूल जाते है कि, इस सफलता की चोटी तक पहुँचने के लिए उसने भ्र्षक प्रयास किये है उस सफल मनुष्य से ईर्ष्या करने की बजाए उससे प्रेरित होकर खुद भी आगे बढ़े 
          "प्रयासी मनुष्य की मुट्ठी आज जरूर खाली है ,पर कल सफलता से भर ही जानी है"
मेहनत जितनी भी की जा सके उतनी हर सूरत में करनी चाहिए. फिर वो मेहनत शारीरिक हो , मानसिक हो , या व्यापार को आगे ले जाने की हो कभी हार मत मानो . विपत्तियां तो हर एक पर आती है पर विपत्तियों से जो हार मान लेता है फिर वो विजेता कहा रहता है विजेता कभी हार के डर से, परेशान के डर से हार मानकर बैठ ही नही सकता तभी तो विजेता , विजेता शब्द को अमर बना देता है नेपोलियन  बोना पार्ट को तो सभी जानते होंगे वो एक दिन में 10 हजार पत्र स्वमं लिखा करते थे उनका कहना था 
         " यदि सफलता पाना है तो, असम्भव शब्द से सदैव दूरी बनाना है"
ऐसे ही एक और महान महापुरुष हुए है जिनका नाम है स्वामी विवेकानंद उनका कहना था कि
         " सम्भव की सीमा को जानने का अर्थ है, असम्भव से भी आगे निकल जाओ "
ये सभी गुणी लोग रहे है ये ऐसे ही पूरे विश्व में पूजे नही जाते इसके पीछे इन सभी के द्वारा किये गए इनके कर्म है जो आज भी कई वर्षो  उपरांत याद किये जाते है रतन नवल टाटा को तो सभी जानते है उनका भी कहना है                  
         "सफलता का दूसरा अर्थ है ,मनुष्य का तप " 
अर्थात , मनुष्य जितनी अधिक मेहनत में तपेगा उतना ही सफल बनेगा. एक बहुत अच्छी बात कहते है रतन नवल टाटा कि, 
         " ह्र्दय की गति E.C.G मशीन द्वारा ज्ञात की जाती है यानि  ह्र्दय ठीक प्रकार से कार्य कर रहा है पर जब  ह्र्दय की गति ऊपर नीचे नही जाकर सीढ़ी रेखा में जाती है तो मनुष्य की मौत हो जाती है" जीवन भी ऐसा ही है कभी ऊपर तो कभी नीचे और यदि, कुछ नही करोगें तो , सीधी रेखा में जीवन व्यर्थ ही हो जाएगा