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    मेरठ में कोरोना के चलते निजी अस्पतालों पर कसेगा प्रोटोकाल का शिकंजा

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    मेरठ और आसपास के क्षेत्रों में इनिदनों कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रशासन ने भी कमर कस ली है। मेडिकल कालेज में कोविड से मृत्यु की दर 22 फीसद बनी हुई है, जिसकी बड़े कारण निजी अस्पतालों से मरीजों का देर से रेफर किया जाना है। प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने अक्टूबर और नवंबर में मेडिकल के कोविड केंद्र में हुई मौतों की पड़ताल की,और आगाह किया कि प्रोटोकाल का पालन न करने वाले निजी अस्पतालों पर शिकंजा कसा जाएगा। शासन की टीम निजी अस्पतालों के साथ मीटिंग कर कोरोना से निपटने का ठोस प्लान बनाएगी।

    मेडिकल कालेज में एक हजार डाक्टरों के साथ बैठक

    प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने माना कि मेडिकल कालेज-एल3 केंद्र में ऐसे मरीजों की संख्या अधिक है, जिनका लंबे वक्त तक निजी अस्पतालों में इलाज चला। तबीयत में सुधार न होने पर मेडिकल कालेज भेजा गया, जहां पहुंचने तक मरीज की स्थिति बेहद गंभीर हो गई। 90 फीसद मरीज निजी अस्पतालों से रेफर किए गए हैं। घर पर इलाज करने से संक्रमण लंग्स में फैल गया। डीएम के बालाजी ने बताया कि मेडिकल कालेज के सभागार में शनिवार और रविवार निजी अस्पतालों व आइएमए के एक हजार से अधिक डाक्टरों के साथ बैठक होगी। सांस एवं बुखार के मरीजों के इलाज को लेकर प्रभावी गाइडलाइन बनाई जाएगी।

    कोरोना टीकाकरण की तैयारी

    साथ ही उन्हें आगामी जनवरी-फरवरी में संभावित कोरोना टीकाकरण को लेकर तैयार रहने के लिए भी कहा जाएगा। 235 निजी अस्पतालों में से अधिकतर नान-कोविड लोगों द्वारा संचालित हैं, जिसमें कोविड प्रोटोकाल का लगातार उल्लंघन हो रहा है। यहां पर संदिग्ध मरीजों की जांच न करने, लक्षणों को छुपाने एवं केस बिगड़ने पर गुपचुप मेडिकल कालेज भेजने का सिलसिला चल रहा है। डीएम ने आगाह किया है कि जिन अस्पतालों में कोविड प्रोटोकाल का पालन नहीं होगा, वहां लाइसेंस निलंबित करने की कार्यवाई होगी। निजी अस्पतालों में मानकों की जांच के लिए स्वास्थ्य डिपार्टमेंट की टीम रैंडम जांच शुरू करेगी। सीएमओ डा. राजकुमार ने बताया कि जिले में करीब दो सौ चिकित्सकों एवं क्लीनिक संचालकों को महामारी प्रवेंशन प्रोटोकाल का प्रशिक्षण दिया गया, किन्तु तब भी लापरवाही हुई।