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    3500 करोड़ के बाइक बोट घोटाले में बर्खास्त मैनेजर बोले विजय शर्मा चलाता था पूरा बैंक

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    करीब 3500 करोड़ के बाइक बोट घोटाले में करोड़ों की हेराफेरी करने वाले नोबेल बैंक के निदेशक विजय शर्मा ने अपनी गर्दन बचाने के लिए बैंक के मैनेजर आरके नागपाल को बर्खास्त कर दिया था। अब वह ईओडब्ल्यू के गवाह बन गया है। उसने जांच के दौरान ईओडब्ल्यू को बताया कि पूरा बैंक विजय शर्मा ही चलाता था। हर ट्रांसजेक्शन विजय शर्मा के कहने पर ही होती थी। विजय शर्मा ने गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड (जीआइपीएल) के निदेशक संजय भाटी और आइटीवी के डायरेक्टर बिजेंद्र हुड्डा के साथ मिलकर करोड़ों की संपत्ति बना डाली।

    एएसपी ईओडब्ल्यू राम सुरेश यादव ने बताया कि नोएडा निवासी विजय शर्मा मूलरूप से हाथरस जिले के चंद्रपुरी मोहल्ले का रहने वाला है। साल 2003 में विजय ने नोबेल बैंक की स्थापना कर चार जनपदों में आठ ब्रांच खोली। वर्तमान में विजय बैंक के सीईओ हैं। उनका एक बेटा गोविंद भारद्वाज कानूनी सलाहकार है, दूसरा बेटा राघव भारद्वाज डिप्टी सीईओ है। साल 2018 में बिजेंद्र सिंह हुड्डा की आइटीवी और संजय भाटी ने अपनी जीआइपीएल कंपनी के सभी खाते बिना केवाइसी की शर्ताें को पूरा कर खुलवाए। इसके बाद विजय शर्मा ने नियमावली को ताक पर रखकर दो लाख 61 हजार फर्जी चेक छपवाकर बाइक बोट के निवेशकों को बांट कर गुमराह कर दिया। यह विजय शर्मा ने संजय भाटी और बिजेंद्र हुड्डा के कहने पर किया था। मामले से पर्दा उठने के बाद विजय शर्मा ने अपनी गर्दन बचाने के लिए बैंक मैनेजर आरके नागपाल को बर्खास्त कर दिया। आरके नागपाल ने ईओडब्ल्यू की टीम को बताया है कि पूरा षड्यंत्र विजय शर्मा के इशारे पर होता था। पूरा बैंक संजय भाटी और बिजेंद्र के इशारे पर विजय शर्मा चला रहा था। बाइक बोट घोटाले के बाद बैंक का टर्न ओवर भी नहीं के बराबर पहुंच गया। एएसपी ने बताया कि विजय शर्मा की कुंडली खंगाली जा रही है। उसकी संपत्ति का ब्योरा भी जुटाया जा रहा है। साथ ही बैंक से जुड़े बाकि कर्मचारियों से भी पूछताछ की जाएगी। कहा जा रहा है कि कंपनी की मोटी रकम नोबेल बैंक में ही जमा की जाती थी।