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    सुभारती लॉ कॉलिज के प्राचार्य डा. वैभव गोयल भारतीय ने दिया व्याख्यान

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    उत्तर प्रदेश शासन द्वारा मेरठ सहित प्रदेशभर के सभी चिकित्सा एवं शिक्षण संस्थानों में महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा एवं सशक्तिकरण के उद्देश्य से व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। जिसके अन्तर्गत महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक, स्वास्थ्य एवं कानूनी मामलों से जुडे़ आवश्यक मुद्दों पर सेमिनार आयोजित कराने, आत्मरक्षा की भावना को सुदृढ़ करने के लिये मार्शल आर्ट एवं जूडो कराटे का प्रशिक्षण देने, उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने, नुक्कड नाटक, कविताओं, गोष्ठियों, पेंटिंग व कठपुतली मंचन आदि के माध्यम से शहरी एवं ग्रामीण महिलाओं को जागरूक करना है।
    इस जागरूकता अभियान के दूसरे चरण में कोविड-19 के मानकों का पालन करते हुए लाला लाजपतराय मेडिकल कॉलिज के प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में एक सेमिनार ‘‘ लीगल एंड एथिकल इश्यूज ऑफ रेप विकटिम‘‘ के विषय पर आयोजन किया गया।
    इस सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय के सुभारती लॉ कॉलिज के प्राचार्य एवं डीन प्रोफेसर डा. वैभव गोयल भारतीय रहे। उन्होंने अपने सम्बोधन में बलात्कार पीडित महिलाओं के कानूनी एवं नैतिक मुद्दों को रेखांकित करते हुए कहा कि बलात्कार पीडिता बालिग हो या नाबालिग, सामान्य हो या विक्षिप्त उसकी पहचान का खुलासा नही करना चाहिए क्योंकि यह उसकी निजता का अधिकार है। उन्होंने चिकित्सकों से कहा कि बलात्कार पीडिता की मेडिकल जांच उपचार के लिए आए रोगी की भांति नही करनी चाहिए, क्योंकि आप उसके केवल एक चिकित्सक ही नही बल्कि उसके अभिभावक की भांति भी है जो पीडिता की मनोदशा को अच्छे से समझ सकता हैं। चिकित्सक पीडिता के काउंसलर बनकर उसकी मानसिक एवं शारीरिक पीड़ा को कम करने में सहयोग कर सकते है। बलात्कार पीडिता को हर स्तर पर सांत्वना देनी चाहिए मगर दुर्भाग्य से पीडिता को हर स्तर पर प्रताडना मिलती है। मीडिया, पब्लिक एवं राजनैतिक गलियारों में पीडिता से जुड़ी खबरों को बढ़ा चढ़ा कर दिखाया जाता है जो कि बहुत दुखद एवं निंदनीय है।
    स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के समाज विज्ञानी प्रोफेसर डा. सरताज अहमद ने कहा कि विभिन्न शोध कार्यो के निष्कर्ष से पता चलता है कि महिलाओं से जुड़े इस तरह के अधिकतर अपराध पीडिता के परिचितों द्वारा ही किये जाते है अतः महिलाओं को बहुत ज्यादा सर्तक रहने की आवश्यकता है। समाज द्वारा बलात्कार पीडिताओं को मनोवैज्ञानिक रूप से हर संभव मदद करनी चाहिए। जिससे महिला को मानसिक रूप से सशक्त होने और इस अनहोनी के सदमें से उभरने में मदद मिल सकें। पीडिता के परिवारजनों को भी समाज के ताने, उलहाने एवं प्रताडनों से प्रभावित होकर विभिन्न प्रकार की मानसिक परेशानियों झेलनी पड़ती है। अतः समाज द्वारा उनको भी सामाजिक रूप से सशक्त करने में मदद करनी चाहिए। इस अवसर उप प्राचार्य डा. विनय अग्रवाल, स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. उर्मिला कार्या, डा. शालिनी, डा. प्रज्ञा सहित कम्यूनिटी मेडिसन, चर्म रोग, जनरल मेडिसन एवं नर्सिंग के शिक्षक एवं परा स्नातक छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।