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पाकिस्तान को जनरल रावत की चेतावनी कहा अगर आतंक को समर्थन जारी रहा तो करेंगे बल प्रयोग

जनरल बिपिन रावत ने स्पष्ट किया है कि यदि पाक आतंकवाद को समर्थन देना जारी रखेगा तो सेना की बल प्रयोग की रणनीति बहुत स्पष्ट होगी।
भारत के नए आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत का कहना है कि हमारी सेना पाकिस्तान तथा चीन से एक साथ जंग लड़ने के लिए तैयार है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि टकराव का रास्ता छोड़कर हम सभी को सहयोग के मार्ग तलाशने चाहिए। एक टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि सीमा पार आतंकवाद से निपटने के लिए भारत के पास सर्जिकल स्ट्राइक से भी अधिक प्रभावी मार्ग हैं जिनसे ऐसा ही संदेश उन्हें दिया जा सकता है। यह हमारी सेना के लिए भविष्य में हथियार होगा, यह कहना ठीक नहीं होगा।
जनरल रावत का कहना है कि अगर हमारा दुश्मन आतंकवाद को समर्थन देना लगातार जारी रखता है तो ऐसी स्थिति में हमारी बल प्रयोग की रणनीति बहुत स्पष्ट है। हम अपनी आवश्यकता  के अनुसार इसका उपयोग करेंगे। इसके लिए सरकार ने भी सेना को खुली छूट दे रखी है। इस साक्षात्कार के दौरान उन्होंने पाक के नए आर्मी चीफ जनरल बाजवा के विषय में कहा कि हम दोनों एक-दूसरे की क्षमताओं को समझते हुए इसी संदेश के साथ दोनों आगे बढ़ें तो शांति कायम रहेगी।
हाल में हुए सेना के बेस कैंपों पर हमले के प्रश्न पर उन्होंने बताया कि पूरी दुनिया में आतंकवादी हमलों के अपने तरीके बदल रहे हैं। खासतौर पर भारत में आतंकवादी सेना के कैंपों पर हमला कर रहे हैं। लेकिन खुद को उनसे बचाने के लिए हमें उनसे आगे की सोचनी होगी। यह सोचना होगा कि आतंकियों का अगला कदम क्या होगा। इस अवसर पर उन्होंने सरकार से मिली गाइडलाइंस का भी जिक्र किया था। उन्होंने कहा कि इनसे हम हमलों पर काबू पा सकते है।
वरिष्ठ अधिकारियों के बाद भी खुद को सेना प्रमुख बनाए जाने पर उनका कहना है कि उन्हें अपने वरिष्ठ अधिकारियों से पूरा सहयोग मिला है। ये मिसाल देने लायक है। उन्होंने कहा कि पद संभालने के पश्चात उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी के साथ बात की थी। इसमें उन्होंने पाया था कि वह इस बात से व्यथित नहीं थे।
पश्चिम बंगाल में सेना से जुड़े राजनीतिक विवाद के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि सेना हमेशा से राजनीति से दूर रही है। सेना का कार्य सेना पर छोड़ देना चाहिए। सिविल-मिलिट्री संपर्क की स्वस्थ व्यवस्था बनी है कि सेना के मामले में राजनीति न हो। अगले तीन वर्ष के कार्यकाल में चुनौतियों के प्रश्न पर उन्होंने कहा, 'सेना में मॉडर्न तकनीक का प्रयोग हो, साथ ही मानव संसाधन का विकास भी आवश्यक है।